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मत आया करो तुम ख़्वाबों में

मत आया करो तुम ख़्वाबों में

मत आया करो तुम ख्वाबों में,
क्योंकि आते हो जब भी बवाल कर जाते हो;
दिल का चैन तो खो ही जाता है देखकर तुम्हें,
और नींदों का भी बुरा हाल कर जाते हो।
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बोलते नहीं कुछ, बस मेरा दीदार कर जाते हो,
तो कभी आँखो ही आँखो में इज़हार कर जाते हो।
खामोशी में भी कितने सवाल कर जाते हो?
और एक बार नहीं, तुम ये हर बार कर जाते हो।
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समझ से परे है, ये मौजूदगी का एहसास तेरा;
ऐसा लगता है जैसे कि मेरी रूह में ही बस जाते हो;
कभी-कभी लगता है कि मुझसे धनवान कोई नहीं,
तो कभी मुझे, मुझसे ही कंगाल कर जाते हो।
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(Copyright@भावना मौर्य "तरंगिणी")

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