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ज़िन्दगी की किताब में

ज़िन्दगी की किताब में

ज़िन्दगी की किताब में, 
अब भी कुछ पन्ने खाली हैं;
आगे के पन्नों में लिखना है क्या? 
इसी सोच की जंग जारी है;
किन रिश्तों के रंग भरें हम,
किन रिश्तों की स्याही काली है;
किस-किस का लिखे हिसाब हम,
और किस-किस की चढ़ी उधारी है;
जीवन को सुगम बनाने को, 
आखिर करते सब कोशिशें सारी हैं;
पर जीवन जीने की दौड़ में,
अंत में सबने ही, बाजी हारी है;
किसी दूजे का मज़ाक उड़ाना क्या,
कल अपनी भी तो बारी आनी है; 
जीवन के इस चलधारा में, ज़िन्दगी-
कभी शांत, तो कभी बहुत बवाली है;
बस जब तक मौत नहीं आती है,
तब तक भरने हैं वो पन्नें, जो खाली हैं।
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---(Copyright @भावना मौर्या "तरंगिणी")---
नोट: मेरी पिछली रचना आप इस लिंक के माध्यम से पढ़ सकते हैं- Hey World!!...She is Boon https://medhajnews.in/news/entertainment/poem-and-stories/hey-world-she-is-boon