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ये फासलें मिटा दो

ये फासलें मिटा दो

कुछ हम कदम बढ़ा लें,
कुछ तुम कदम बढ़ा दो;
ये दूरियाँ हैं अब चुभती,
तो ये फासले मिटा दो;
गुमसुम क्यों हो इतना?
ज़रा खुल के मुस्कुरा दो;
कुछ मेरी तुम सुन लो,
कुछ अपनी भी तुम सुना दो;
आओ,पास मेरे आओ और ये दूरियाँ मिटा दो।
थोड़ी देर साथ मेरे बैठो,
कुछ लम्हें संग बिता लो;
कुछ नज्में मेरी सुन लो,
कुछ अपने गीत गुनगुना दो;
अब तक मेरे चुप रहने की,
न खामोशियों से सजा दो;
जो बात हो तुम्हारे दिल में,
मुझे खुल कर तुम बता दो;
थोड़ा आगे बढ़ लो, और ये फासले मिटा दो।
आओ पास मेरे आकर,
कसकर गले से तुम लगा लो;
मेरी आँखों में ज़रा झाँकों,
थोड़ा अपनी पलकों को उठा लों;
आओ हाथ मेरा थामों,
मुझे अपना तुम बना लो।
गर मैं जो बहक जाऊँ,
तो तुम मुझे सम्भालो;
कहीं वक्त ना बीत जाये, अब ये फासले मिटा दो।
ये ज़िन्दगी है बेशकीमती,
इसे और खुशनुमा बना दो;
बेपनाह प्यार के सागर में,
चलो मुझको तुम डुबा दो;
कुछ कदम हम बढ़ा दें,
कुछ तुम कदम बढ़ा लो;
ये दूरियाँ हैं अब चुभती,
तो ये फासले मिटा दो;
बहुत सह ली हमने दूरी, अब ये फासले मिटा दो।
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----(Copyright@भावना मौर्य "तरंगिणी")----