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ज़िन्दगी इतनी मुश्किल भी नहीं

ज़िन्दगी इतनी मुश्किल भी नहीं

ज़िन्दगी इतनी मुश्किल भी नहीं
ज़िन्दगी इतनी मुश्किल भी नहीं है दोस्तों, बस हमारी सोच और इसे देखने के नज़रिये का अंतर होता है। इसलिये जिन्हें ज़िन्दगी सिर्फ मुश्किलों भरी लगती है, उनसे मेरी गुजारिश है कि थोड़ा खुद को और थोड़ा अपने देखने के नज़रिये को बदलिए और ज़िन्दगी के उन पहलुओं को भी देखिए जिसने आपको कभी खुशियों से रूबरू करवाया है, आपको ये नीरस ज़िन्दगी भी अपने आप ही अच्छी लगने लगेगी। हमेशा याद रखिये कि 'रात के बाद दिन ही आता है' तो 'यदि अभी मुश्किलों भरी रात है तो खुशियों का सवेरा भी निश्चित ही होगा बस उस सुबह होने तक थोड़ी सी हिम्मत और सब्र की ज़रूरत होती है।' नीचे लिखी इन पंक्तियों में मैंने ऐसा ही कुछ कहने का प्रयास किया है; पढ़िए शायद आपको अच्छा लगे:-

ज़िन्दगी इतनी ज्यादा,
मुश्किल भी नहीं हैं,
अपने देखने का नज़रिया, 
जरा बदल कर तो देखो,

खुशी पाने ख्वाहिश रखते हो जो
तो पहले तुम भी किसी की,
खुशियों का ज़रिया,
कभी बन कर तो देखो;

किसी को बेहिसाब देने के लिए, 
बेहिसाब होना भी तो जरुरी है,
इसलिए पहले अपने दिल का, 
दरिया भर कर तो देखो;

बिना संघर्ष के हार मान जाना, 
तो कायरता की निशानी है,
इसलिये जंग के मैदान में,
पहले उतर कर तो देखो;

जीने की चाहत खुद ही,
बढ़ने लगेगी तुम में,
किसी के इश्क़ में कभी, 
जरा सँवर कर तो देखो;

हद में रह कर हमेशा,
मंजिल हासिल होती नहीं है,
इसलिये अपनी कोशिशों में कभी,
हद के बाहर, गुजर कर तो देखो।
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---(Copyright@भावना मौर्य "तरंगिणी")---
मेरी पिछली रचना आप इस लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं:- 
कहना नहीं आया: https://medhajnews.in/news/entertainment/poem-and-stories/didnot-know-how-to-say