होम > मनोरंजन > कवितायें और कहानियाँ

सुन लो न...!!

सुन लो न...!!

सुन लो न मेरी उन बातों को भी तुम,
जो मैं कहती नहीं हूँ तुमसे, लबों से कभी;
पढ़ लो न मेरी इन आँखों को भी तुम,
जिसमें बसते हो बस, तुम ही-तुम ही।
☆☆☆

समझ लो न मेरे उन एहसासों को भी तुम,
जो पनपने लगते हैं तेरी मौजूदगी से ही;
कह दो न अपने उन ज़ज्बातों को भी तुम,
जो तुम्हारे दिल में तो हैं, पर लबों पे आते नहीं।
☆☆☆

छु लो न मेरे इस अंतर्मन को भी तुम,
जो रूहानी हो गया है, तुमसे मिलते ही;
महसूस कर लो न मेरी उन आहटों को भी तुम,
जो तरंगित हो उठती हैं, तेरे स्पर्श भर से ही।
☆☆☆

जी लो न इस हसीं जिंदगानी को हर पल,
जिसका हिस्सा हों, बस मैं और तुम ही।
रचने दो न प्यार की एक कहानी को हमें,
जिसे भुलाया न जा सके, भुलाने से भी।
☆☆☆

---(Copyright@भावना मौर्य "तरंगिणी")---