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इश्क़ जब हो जाये

इश्क़ जब हो जाये

इश्क़ जब हो जाये, 
तो इज़हार ज़रूरी लगता है,
एहसासों से भरा हुआ,
संसार ज़रूरी लगता है,
खमोशी में भी तब तो, 
बातें हजार हो जाती हैं,
पर फिर भी लफ्जों का, 
हथियार ज़रूरी लगता है,
चंद लम्हों का अलगाव भी, 
तब सदियों की दूरी लगता है,
इश्क़ बिना कोई रिश्ता भी, 
बस मजबूरी लगता है,
जब प्रेम सामने होता है तो, 
जीवन सिंदूरी लगता है।
---(Copyright@भावना मौर्य "तरंगिणी")---

नोट: मेरी पिछली रचना आप इस लिंक के माध्यम से पढ़ सकते हैं-
क्या हूँ मैं?  https://medhajnews.in/news/entertainment/poem-and-stories/who-am-i