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कहानी- तो क्या डिसाइड किया तुमने? (भाग-1)

कहानी- तो क्या डिसाइड किया तुमने? (भाग-1)

कहानी- तो क्या डिसाइड किया तुमने? (भाग-1)

'जी कहिये, मुझे यहाँ क्यों बुलाया आपने?' अनु ने रेस्ट्रोरेंट में चेयर पर बैठते हुए सामने बैठे विशेष से पूछा।

'अरे पहले बैठ तो जाओ आराम से, अच्छा बताओ क्या मंगाऊँ तुम्हारे लिए कुछ ठंडा या गरम? वैसे मिज़ाज देख कर तो लग रहा है कि तुम्हें ठंडे की ही ज्यादा जरुरत है' विशेष ने प्यार से निहारते हुए अनु से कहा।

'मैं यहाँ कोई चाय-काफी पीने नहीं आयी हूँ। आपने बुलाया है इसलिए आयी हूँ। तो बताइये किस लिए बुलाया है मुझे?' अनु भी चिढ़ते हुए बोली।

'अच्छा, मेरी बात अब भी इतना मानती हो तो मान क्यों नहीं जाती फिर, जो कहा था मैंने तुमसे' विशेष ने प्यार बरसाते हुए अनु से कहा।

अनु जैसे भूल ही गयी थी कि विशेष किस बारे में बात कर रहा है, तो चिढ़ते हुए बोली कि- 'आप किस बारे में बात कर रहे हैं?'

'तो क्या डिसाइड किया तुमने? विशेष ने एक भौं उठाते हुए जवाब न देकर फिर से सवाल किया अनु से।

'क्या, किस बारे में? किस बारे में बात कर रहे हैं आप?' अनु भी असमंजस में विशेष से बोली।

'अरे! हमारी शादी के बारे में क्या डिसाइड किया तुमने?' विशेष ने फिर मुस्कुराते हुए अनु से पूछा।

अनु आश्चर्य से देखते हुए विशेष से बोली 'आप पागल-वागल हो गए हैं क्या? उम्र देखी है अपनी? जो इस उम्र में शादी का भूत सवार हो गया है आप पर।'

'अरे! प्यार का और शादी का उम्र से क्या लेना-देना? अब मन है शादी करने का तो सोच रहा हूँ की कर लेते हैं। वैसे सभी करते हैं तो हम भी कर लेते हैं और तुम्हें प्रॉब्लम क्यों हो रही है? तुम्हें तो बल्कि खुश होना चाहिये।' विशेष ने उसके आश्चर्य को इग्नोर करते हुए नॉर्मली कहा।

'बड़े आये, तुम्हें तो खुश होना चाहिये' अनु ने मुहं बनाते हुए कहा और उसके चेहरे को देख विशेष मुस्कुरा भर दिया। जैसे कि उसे अनु से ऐसी ही कुछ उम्मीद थी।

'हाँ तो बताओ कि क्या प्रॉब्लम है शादी करने से?' मुझे तो कोई प्रॉब्लम नहीं लग रही है और तुम्हें भी तो मेरा साथ पसंद है न? फिर दिक्कत क्या है?' विशेष ने अनु कि आँखों में देखते हुए पूछा।

अनु फिर चिढ उठी- 'क्यों आपको नहीं पता कि क्या प्रॉब्लम है? अरे! हम कोई टीनेजर थोड़ी न हैं। आप 45 साल के हैं  और मैं ही 40 के ऊपर ही हूँ' और आपको इस उम्र में शादी की पड़ी है?' विशेष उसकी बात पर मुस्कुरा उठा।

'अरे तो क्या हुआ, उम्र बढ़ने पर भावनाएं ख़त्म हो जाती हैं क्या? और इसमें उम्र का क्या लेना देना। मैं तुमसे शादी करना चाहता हूँ और अगर तुम भी चाहती हो तो दिक्कत ही कहाँ है'' विशेष समझते हुए बोला।

'अरे है दिक्कत' अनु भरी हुई बोली।

'कहाँ है दिखाओ?' विशेष भी कहाँ पीछे हटने वाला था।

'शायद आप भूल रहे हैं कि आप हम दोनों ही शादीशुदा है। यहीं नहीं हमारे बच्चे भी कोई छोटे तो नहीं हैं। हमें दिक्कत हो न हो पर बच्चो को तो दिक्कत हो सकती है। और मैं अपनी ख़ुशी के लिए उनको दुखी नहीं दे सकती। मेरे सारी दौलत और सुख उन्हीं से हैं' अनु ने अपनी बात समझाने के अंदाज में विशेष से कहा।  

'और मुझसे तुम्हारा कोई वास्ता नहीं है? क्या मैं कुछ भी नहीं हूँ तुम्हारे लिए?' विशेष से प्रश्नवाचक दृष्टि से अनु को देखा। 

'अरे! आप समझ क्यों नहीं रहे हैं? यह बात ये नहीं है कि.....


जारी अगले भाग में....
-----(Copyright@भावना मौर्य "तरंगिणी")-----

पाठकों से: आपको क्या लगता है कि अनु क्यों मना कर रही है विशेष को शादी के लिए? जानने के लिए पढ़ते रहें मेधज न्यूज़ और अगर कहानी पसंद आ रही है तो तो कहानी के टाइटल के नीचे दिए गए लाइक बटन को दबाएं और मेरा उत्साहवर्धन करते रहें :-))