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तरंगिणी हूँ मैं

तरंगिणी हूँ मैं

कोई ख्वाब नहीं हूँ, हकीकत हूँ मैं;
किसी खुशनसीब की ज़िन्दगी की, जरुरत हूँ मैं।
शायद दुनिया के ख़ूबसूरती के पैमानों पर, मैं खरी न उतरूँ,
पर किसी के लिए, जहाँ में सबसे खूबसूरत हूँ मैं;
किसी के एहसासों की संगिनी हूँ मैं,
किसी के रागों की रागिनी हूँ मैं;
अभी तो शुरुआत है, अभी बहुत बहना है मुझे;
अपने सागर की ओर बह चली 'तरंगिणी' हूँ मैं;
किसी की आँखों का इंतेज़ार हूँ मैं,
किसी के दिल में उफनता प्यार हूँ मैं,
और किसी से मेरी कोई आरज़ू नहीं है,
सिर्फ़ उसकी ही चाहत की तलबगार हूँ मैं;
कोई है जिसकी ज़िन्दगी की ख़ुमारी हूँ मैं,
जिससे करार मिलता है उसे, उसके लिए वही बेकरारी हूँ मैं,
सिर्फ उसी की यादों में हकदार बनना है मुझे,
उस पर ही सब कुछ अपना वारी हूँ मैं।
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----(Copyright@भावना मौर्य "तरंगिणी")----
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