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कहानी- ये आँखे कुछ कहती हैं (भाग-7)

कहानी- ये आँखे कुछ कहती हैं (भाग-7)

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कहानी- ये आँखे कुछ कहती हैं (भाग-7)

इधर एक पूरी रात गुजर गयी भव्या की ICU में और उसकी हालत लगातार बिगड़ती ही जा रही थी। उसकी हालत ऐसी भी नहीं थी कि उसे कहीं और शिफ्ट किया जा सके। बीच-बीच में विशाल का भी फ़ोन आता जा रहा था। फिर अचानक से डॉक्टर आये और बोले कि भव्या अपने फैमिली वालों से मिलना चाहती है। तो हम तुरंत डॉक्टर के साथ ICU  की ओर भागे। देखा तो भव्या की हालत बहुत ही ख़राब थी और उसने मेरी और हाथ बढ़ा दिया मैंने दौड़ कर उसका हाथ थाम लिया और फफक कर रो पड़ी उसे इतने दर्द में तड़पता देखकर। मैंने उससे कहा- बेटा हिम्मत रख, हम सब हैं न तेरे साथ, ठीक हो जाएगी तू। रूक, मैं अभी मैडी को फ़ोन करती हूँ और विशाल भी आ ही रहा है बस पहुँच जायेगा शाम तक। पर जैसे ही मैं फ़ोन मिलाने लगी उसे मेरे हाथ को और तेज़ पकड़ लिया और जब मैंने उसकी और देखा तो उसने अपने सिर को 'नहीं' कहते हुए हिलाया। मेरी आँखों से सैलाब टूट पड़ा ये देख कर कि इसे अभी भी बस तेरी ही चिंता थी।

मैंने उससे कहा कि बेटा मैडी को तो पता होना ही चाहिए, तो उसने मेरे हाथों को तेज़ी से दबाते हुए मना किया। उसकी हालत लगातार नाज़ुक होते जा रही थी पर फिर वो बहुत हिम्मत दिखा रही थी। फ़िर कुछ दर के लिये वो बेहोश हो गयी। इधर शाम तक विशाल भी पहुँच गया और उसकी आँखें तो लगातार बहती ही जा रही थी कि उसकी एकलौती गुड़िया जैसी बहन आज इस हालत में हैं और वह कुछ भी नहीं कर पर रहा है। फिर अचानक से भव्या की साँसें उखड़ने लगी। हम सबके साथ-साथ वो बुजुर्ग दंपत्ति भी डॉक्टर से बार-बार यही कर रहे थे कि सर प्लीज इस बच्ची बचा लीजिये। विशाल तो जैसे अपनी सुध-बुध ही खो बैठा था आखिर कैसे अपने मम्मी-पापा की आखिरी निशानी, अपनी जान से प्यारी बहन को खोते देख सकता था पर अफ़सोस देख रहा था असहाय सा।

 

सभी भव्या को घेरकर खड़े थे और विशाल ने उसके हाथों को मजबूती से पकड़ रखा था। उसने कहा- 'गुड़िया तू हिम्मत रख, कुछ नहीं होगा तुझे, हम सब हैं न तेरे साथ।' पर अगर सिर्फ बातों से इंसान ठीक होता तो शायद कोई मरता ही नहीं इस दुनिया में और डॉक्टर्स भी नहीं होते शायद। मैं भी भव्या के सिर को सहलाते हुए लाचार सी उसकी आँखों की तड़प देख रही थी। मैंने महसूस किया कि वो तुम्हें खोज रही है पर ये भी जानती थी कि शायद अब ये मुमकिन नहीं है। तभी अचानक से भव्या ने विशाल के हाथों को कसकर पकड़ मजबूत की और अपने दाएं हाथों को बहुत मुश्किल से विशाल के पीछे इशारा किया। पर इससे पहले कोई कुछ समझ पाता हम सबने खो दिया उसे और विशाल की चीख निकल गयी- 'गुड़िया...या ...या, तू मुझे छोड़ कर कैसे जा सकती है? क्या कहूँगा मैं मम्मी-पापा से कि मैं उनकी गुड़िया का ख्याल नहीं रख पाया, नहीं बचा पाया उसे।' कोई कुछ समझ ही नहीं पा रहा था कि कैसे संभाले विशाल को? इसीलिए उसे जी भर रोने दिया हमने। काफी देर तक वो भव्या के हाथों को पकड़ कर उससे लिपट कर रोता रहा। पर मेरी नज़र तो भव्या की आँखों पर ही थी जो कितनी अधूरी ख्वाहिशों के साथ अभी भी खुली हुई थी। तभी डॉक्टर ने आकर विशाल को उससे दूर किया और भव्या की खुली आँखें बंद की।

 

फिर डॉक्टर ने कहा कि- 'हमें बहुत अफ़सोस है कि बहुत कोशिशों के बाद भी हम इन्हें नहीं बचा पाए, वैसे ये समय सही नहीं हैं इस बात को करने का पर अगर आप लोग चाहें तो इनके जाने के बाद भी ये किसी को एक नयी ज़िन्दगी दे सकती हैं और किसी दूसरे रूप में आप इन्हें वापस पा सकते हैं।' सब आश्चर्य से डॉक्टर की ओर देखने लगे क्योंकि इतना तो वहाँ खड़े सब लोग जानते ही थे कि कि –‘माना विज्ञान ने बहुत तरक्की कर ली है पर इतनी भी नहीं कि किसी को मरने के बाद भी जीवित करने का चमत्कार कर सके'।  तभी डॉक्टर ने कहा कि इनके शरीर पर गहरी चोट आने की वजह से इनके कई आंतरिक अंग ख़राब हो गए पर इन आँखें अभी भी ठीक हैं अगर आप लोग सहमति दें तो नेत्रदान द्वारा किसी के बेरंग जीवन में रंग आ सकता है। इन्हीं के साथ कल जो लड़की आयी थी उसने भी कल के हादसे में अपने होने वाले पति को और अपनी आँखों की रोशनी दोनों ही खो दी। फिर उन्होंने विशाल की तरफ देखकर कहा हम उनके पति और आपकी बहन को तो वापस नहीं ला सकते पर साइंस की मदद से उस बच्ची के आँखों की रोशनी तो वापस ला ही सकते हैं।

 

सब डॉक्टर की बात सुन तो रहे थे पर कोई भी कुछ कहने की स्थिति में नहीं था। तभी विशाल चीखा- 'ये क्या कह रहे हैं डॉक्टर आप, जिस लड़की और उसके परिवार को बचाने के चक्कर में मैंने अपनी एकलौती बहन को खो दिया अब उसी की ज़िन्दगी में रंग भरने के लिए मैं अपनी बहन के शरीर के साथ आप लोगो को खिलवाड़ करने दूँ।  नहीं, कभी नहीं!' तभी डॉक्टर ने विशाल से कहा कि- 'मैं समझता हूँ आपकी भावनाओं को पर आप खुद ही सोचिये कि जिस लड़की की ज़िन्दगी आपकी बहन ने बचायी हो वो ज़िन्दगी तो आप लोगों के लिए वैसे ही अनमोल हो गयी। आपको अपनी बहन का जाना ऐसे ही जाया नहीं करना चाहिए। आप खुद सोचिये कि जब वह लड़की आपकी बहन के आँखों से सारी दुनिया देखेगी तो आप खुद ये महसूस कर पाएंगे कि किसी न किसी रूप में आपकी बहन अभी भी है इस दुनिया में। आप अच्छे से सोच लीजिये इस बारे में, मैं आप पर कोई दबाव नहीं डाल रहा बस एक डॉक्टर होने के नाते आपको एक नेक सलाह दे रहा हूँ। वैसे भी नेत्र दान और देहदान को 'महादान' की संज्ञा दी गयी है क्योंकि बाकी सारे दान-पुण्य तो आप जीते जी करते हैं पर केवल एक ये ही दान है जो आपके मरने के बाद भी किसी दूसरे को नयी ज़िन्दगी और जीने की नयी उम्मीद या रोशनी दे जाता है। बाकी आपकी मर्जी।

 

तभी डॉक्टर जाने लगा पर दो कदम बढ़ते ही उसने पलट कर विशाल से कहा- 'वैसे मिस्टर विशाल, आपकी बहन भी यही चाहती थी। ज़रा याद कीजिये जब उन्होंने आखिरी सांसे लेने से पहले, आपके पीछे के ओर इशारा किया था। एक्चुअली आपके पीछे एक देहदान और नेत्रदान का पोस्टर लगा था दीवार पर।  शायद वो समझ गयी थी कि अब उनका बचना मुश्किल है इसीलिए वो उस पोस्टर की और इशारा करके आपको अपनी इच्छा बताना चाह रही थीं। आप लोग सोच कर बता दीजिये जल्दी से क्योंकि उनकी बॉडी को ज्यादा देर ऐसे ही रखना ठीक नहीं होगा।'

 

विशाल ने अश्रुभरी प्रश्नवाचक नजरों से हमारी तरफ देखा - 'कि आखिर क्या करे वो?' पर हम सब भी सदमें में थे तो उसे क्या सलाह देते? फिर अचानक से वो खड़ा हुआ और अपने आँखों के आंसू पोछते हुए डॉक्टर के केबिन में चला गया। थोड़ी देर बाद डॉक्टर और विशाल केबिन से बाहर आये जहा भव्या का शरीर पड़ा हुआ था। और डॉक्टर विशाल के कंधे पर हाथ रखते हुए कह रहे थे कि- 'मिस्टर विशाल, हमें आप और आपकी बहन पर गर्व है कि आप जैसे लोग भी हैं इस दुनिया में जो अपने दुःख को परे रखते हुए लोगों को सहारा देते हैं।'

 

विशाल-जी नहीं सर, कुछ समय के लिए मैं फौजी होते हुए भी खुदगर्ज हो गया था पर मेरी बहन अच्छे से जानती थी कि जैसे एक फौजी की ज़िन्दगी पर उसका या उसके परिवार का अधिकार न होकर पूरे देश की जनता का अधिकार होता है, वैसे ही एक फौजी की बहन होने के नाते वो पीछे कैसे हट सकती थी? क्योंकि अगर वो खुदगर्ज होती तो सुनसान सड़क पर उनकी मदद के लिए रूकती ही नहीं। मैं अपनी गुड़िया को तो नहीं बचा पाया पर उसकी इस इच्छा को पूरा करने में पीछे नहीं हटूँगा। पर क्या डॉक्टर साहब एक बार मैं उस लड़की से मिल सकता हूँ जिसे मेरी गुड़िया की आंखें मिलने वाली हैं?

 

डॉक्टर- 'विशाल जी, वैसे तो ये रूल के अगेंस्ट हैं पर चूँकि आपने मेरी सलाह का मान रखा तो मैं आपको ज़रूर मिलवाऊंगा उनसे।'

 

(जारी अगले भाग में....)

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