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एहसासों का काफ़िला

एहसासों का काफ़िला

वैसे तो सवालों का काफ़िला चलता है मेरे साथ,
पर तेरी आँखों में देखा तो हर जवाब मिल गया,
जाने किस दौलत की चाह में गुमराह है दुनिया,
मुझे तो तुम मिले, लगा कि आफताब मिल गया।
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इश्क़ की राहों में बेपरवाह है इश्क़ मेरा,
असीमित एहसासों का दरिया है इश्क़ मेरा,
नहीं साबित करना मुझे मेरे इश्क़ की पाकीज़गी,
मेरे मन को समेटने का ज़रिया है इश्क़ मेरा।
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अच्छे तो लगते हैं मुझे तेरे ये अनकहे इज़हार भी,
प्यारा तो लगता है तेरा ये तिलिस्म सा संसार भी,
ये तो सच है कि लबों से सुनने कि चाहत रहती है,
पर समझ आते हैं मुझे तेरे ये प्रेम भरे इनकार भी।
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ज़िन्दगी भर के लिए, साथ दे सको, तो ही आना तुम,
नहीं तो, बना देना कोई हँसी बहाना तुम;
उम्मीद नहीं करेंगे, न ही शिकवा करेंगे कोई,
मेरी तरफ से, कभी भी न घबराना तुम;
ज़िन्दगी भर के लिए, साथ दे सको, तो ही आना तुम।
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(Copyright@भावना मौर्य"तरंगिणी")