होम > मनोरंजन > कवितायें और कहानियाँ

कोहिनूर हो तुम

कोहिनूर हो तुम

सबसे ही जुदा अंदाज है तुम्हारा,
सौंदर्य का अद्भुत प्रतिरूप हो तुम,
ग्रीष्म में हिम सी शीतल हो,
और शीत में खिलती धूप हो तुम,
हर पल दिखते नये रूप हैं तुम्हारे,
भावनाओं से भरा संदूक हो तुम,
कुछ खास नहीं, पर आम भी नहीं हो,
आदर्शता का अलग ही रूप हो तुम,
जो जितना भी जाने, वो ये ही कहे-
'वाह जी वाह, क्या खूब हो तुम!'
जाने क्यों, खुद को गुमनाम कहती हो?
जबकि लोगों के बीच मशहूर हो तुम,
और लोगों का तो पता नहीं मुझे, पर-
मेरी नज़र में तो 'कोहिनूर हो तुम।'
--(Copyright@भावना मौर्य "तरंगिणी")--

नोट: मेरी पिछली रचना आप इस लिंक के माध्यम से पढ़ सकते हैं-  
एक स्त्री जानती है: https://medhajnews.in/news/entertainment/poem-and-stories/a-woman-knows