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यमुना नगर में एक प्राचीन बुरिया शहर

यमुना नगर में एक प्राचीन बुरिया शहर

जगाधरी शहर से लगभग 4 किमी की दूरी पर स्थित है। यह पश्चिमी यमुना नहर के किनारे पर बसा है। बुरिया शहर यमुना नगर में एक प्राचीन शहर स्थित है। जगाधरी क्षेत्र से लगते कस्बा बुरिया की प्राचीन समय से ही देश-विदेश में ख्याति रही है। बुरिया शहर भारत की स्वतंत्रता से पहले एक रियासत थी, जिसके शासक रतन अमोल सिंह थे। राजा के वंशज आज भी बुरिया में रहते है।

बादशाह अकबर के नौ रत्नों में शामिल बीरबल काफी प्रभावी लोगों में शुमार किए जाते थे। बीरबल का राजदरबार के फैसलों में भी काफी दखल होता था। बादशाह अकबर को राज के महत्व पूर्ण कार्य या  जाना होता था या फिर आरामगाह की तलाश होती थी, तो बीरबल उस समस्या को बड़े ही सलीके के साथ हल कर देते थे।

बीरबल के संरक्षण में  बादशाह अकबर के एक मुख्य अभियंता ने बुरिया में एक आनंदित किला बनाया था। यह किला विशेष बेसिन के साथ उठाए गए मैदान के ऊपर बनाया गया है। सैकड़ों साल पहले हरियाणा के बूडिया में बने इस बहु मंजिला भवन को मुगल बादशाह अकबर ने अपनी रानियों के विश्राम के लिए बीरबल के द्वारा बनवाया था। यहां पर अकबर बादशाह कई महीनों तक रहे थे। 

बादशाह अकबर ने इस तीन मंजिला रंगमहल को छोटी लखीरा ईंटों से बने बनवाया  था। इस ईंटों को जोड़ने की लिए कारीगरों ने दो खालिस चूने और देशी तरीको का इस्तमाल कर तैयार किया था। भवन को बनाने में कहीं भी लकड़ी आदि का इस्तेमाल नहीं हुआ था। हवादार खिड़की और खिड़की एक समान थे। 
आज भी लोग इस बीरबल द्वार निर्मित ऐतिहासिक रंगमहल को देखने दूर दूर से आते हैं।