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ग्लोबल वार्मिंग से कम होंगे डेंगू के मामले

ग्लोबल वार्मिंग के कारण हमारे आस पास की दुनिया पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। पूरी दुनिया ग्लोबल वार्मिंग के कारण हो रहे नुकसान को कम करने पर विचार कर रही है। मगर अब इसका एक फायदा भी सामने आया है। 


ग्लोबल वार्मिंग से डेंगू जैसी खतरनाक बीमारी का खतरा कम किया जा सकता है। एक नई रिसर्च में इसकी जानकारी मिली है। गौरतलब है कि डेंगू से हर साल लगभग 39 करोड़ लोग संक्रमित होते है। इतना ही नहीं ये 5 लाख लोगों को गंभीर रूप से बीमार करती है। जबकि हर साल कम से कम 25 हजार लोग इस बीमारी से अपनी जान गंवाते है। 


डेंगू पर ग्लोबल वार्मिंग के असर से संबंधित रिसर्च पेंसिलवेनिया स्टेट यूनिवर्सिटी में की गई है। यूनिवर्सिटी के बायोलॉजी विभाग के प्रोफेसर एलिजाबेथ मैक्ग्रॉ ने रिसर्च के संबंध में बताया कि मच्छर जब डेंगू वायरस का वाहक बनता है तो वो गर्म तापमान के प्रति संवेदनशील हो जाते है। मच्छरों में वायरल इंफेक्शन रोकने वाले बैक्टीरिया वोलबचिया की सक्रियता में इजाफा होता है। इस कारण मच्छरों में गर्मी सहने की क्षमता कम हो जाती है।


रिसर्च के परिणाम से साफ होता है कि लगातार बढ़ रही गर्मी से डेंगू बुखार सीमित होता है। एलिजाबेथ मैक्ग्रॉ ने बताया कि डेंगू जानलेवा है, जिसका कोई सटीक इलाज अबतक उपलब्ध नहीं है। एडीज एजिप्टी मच्छर के काटने से ये बीमारी होती है। ये मच्छर सिर्फ डेंगू नहीं फैलाता बल्कि जीका वायरस, चिकनगुनिया और पीला बुखार भी फैलाता है।


बता दें की बीता कुछ सालों में रिसर्च में सामने आया है कि बैक्टीरियम वोलबचिया पिपियेंटिस इंजेक्ट किया। इसके बाद इन मच्छरों को बाहर छोड़ा गया। वोलबचिया के कारण मच्छरों के शरीर में वायरस आने की आशंका कम होती है। इसमें डेंगू वायरस भी शामिल है। अगर कभी डेंगू का वायरस मच्छर में आ भी जाए तो ये मच्छर में पनप नहीं पाता।


खास बात है कि वोलबचिया एक मच्छर की पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में भी जा सकता है। ऐसे में नई पीढ़ी के मच्छरों में भी डेंगू का खतरा नहीं होता है। मीडिया को उन्होंने बताया कि डेंगू वायरस और वोलबचिया मच्छरों के शरीर में अलग अलग तरह के टिश्यू पर हमला करते है। ये जहरीले नहीं होने के कारण इम्यून स्ट्रेस रेस्पॉन्स पैदा करते है।  वहीं गर्म वातावरण में रहते हुए या बढ़ते तापमान को वो बर्दाश्त नहीं कर पाते। ऐसे माहौल में वो सुस्त हो जाते हैं या फिर मर जाते है।


यूनिवर्सिटी में सेंटर फॉर इंफेक्शियस डिजीस डायनेमिक्स और डिपार्टमेंट ऑफ एंटीमोलॉजी के रिसर्चर्स के शोधकर्ता फैलो वेरय गिलमोर ने बताया कि इस स्टडी में सामने आया कि डेंगू के संक्रमित मच्छर अधिक तापमान पर सुस्त हो जाते है। गर्मी में इनका चलना फिरना भी बंद हो जाएगा। सुस्ती में मच्छर किसी को नहीं काटते है।


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