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किसानों के हक में गन्ना विभाग की एक और पहल

किसानों के हक में गन्ना विभाग की एक और पहल

प्रदेश के गन्ना किसानों को उत्कृष्ट डिजिटल सुविधा प्रदान करने तथा उनके समय तथा धन की बचत कराने एवं विभागीय टोल-फ्री नम्बर पर प्राप्त किसानों के सुझावों के दृष्टिगत ई.आर.पी. की वेबसाइट- enquiry.caneup.in पर ऑनलाइन घोषणा-पत्र भरवाने सम्बन्धी प्रकिया को कृषक हित में और अधिक सरल बना दिया गया है।

गन्ना किसानों की समस्याओं के प्रति अत्यन्त संवेदनशील अपर मुख्य सचिव, चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास, संजय आर. भूसरेड्डी ने बताया कि स्मार्ट गन्ना किसान (SGK) प्रोजेक्ट के अन्तर्गत गन्ना किसान वर्तमान में बहुत तेजी से घोषणा-पत्र ऑनलाइन भर रहे हैं। विभाग के टोल-फ्री नम्बर 1800-121-3203 पर किसानों एवं विभागीय अधिकारियों द्वारा अवगत कराया गया कि सभी किसानों द्वारा एक साथ घोषणा-पत्र भरने तथा आवेदन करने से SGK प्रोजेक्ट की वेबसाइट की गति धीमी हो गयी थी, जिससे ऑनलाइन आवेदन एवं घोषणा-पत्र भरने की प्रक्रिया पूर्ण करने में अधिक समय लग रहा था।

संजय आर. भूसरेड्डी ने बताया कि गन्ना किसानों की इस समस्या का त्वरित संज्ञान लेते हुए विभागीय अधिकारियों तथा SGK प्रोजेक्ट के सेवा प्रदाता से तत्काल वार्ता की गयी तथा ऑनलाइन सदस्यता एवं घोषणा-पत्र भरने की प्रक्रिया को और अधिक सरलीकृत किया गया। जिसके तहत अब किसानों को लॉगिन के लिए आई.डी. अपलोड करने की आवश्यकता नहीं होगी, बल्कि अब केवल अपने आधार नम्बर या बैंक एकाउन्ट नम्बर के अन्तिम चार अंकों के साथ पंजीकृत मोबाईल नम्बर डालने से ऑनलाइन घोषणा-पत्र भरने आदि के लिए साइट ओपन हो जाएगी। यदि किसान का आधार नम्बर, बैंक खाता संख्या एवं मोबाइल नम्बर पंजीकृत नहीं है तो किसानों को अपनी समितियों से सम्पर्क कर इन्हें पंजीकृत कराना होगा।

इस निर्णय से पंजीकृत गन्ना किसानों को काफी सुविधा होगी जहॉं पूर्व में वेबसाइट ओपन करने के लिए आधार कार्ड, आई.डी. आदि अपलोड करनी पड़ती थी। अब इसकी आवश्यकता नहीं रहेगी तथा किसानों के श्रम एवं समय की बचत होगी। वेबसाइट के सर्वर पर डाटा अपलोडिंग का लोड कम होने से वेबसाइट की गति भी और तीव्र हो जाएगी, तथा किसानों के वेबसाइट से सम्बन्धित सभी कार्य त्वरित गति से पूर्ण किये जा सकेगें। यहॉं यह भी उल्लेखनीय है कि विभाग द्वारा विगत सप्ताह किसानों की सुविधा हेतु ऑनलाइन घोषणा-पत्र भरते समय राजस्व खतौनी को अपलोड करने की अनिवार्यता को भी समाप्त किया गया था।

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