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केंद्र ने बदला फैमिली पेंशन पर 50 साल पुराना कानून, कई नए बदलाव

केंद्र ने बदला फैमिली पेंशन पर 50 साल पुराना कानून, कई नए बदलाव

नई दिल्ली: फैमिली पेंशन के मामले में केंद्र सरकार ने एक बड़ा और सकारात्मक बदलाव किया है।  सरकार ने लगभग 50 साल पुराने पारिवारिक पेंशन से जुड़े एक नियम को बदलने का ऐलान किया है। Central Civil Services (Pension) Rules, 1972 के नियम 54 का उप-नियम 11-C के मुताबिक़, जब किसी सरकारी पेंशनधारी की हत्या हो और उसकी हत्या का आरोपी उसका/उसकी पति/पत्नी, या फिर परिवार का कोई ऐसा सदस्य हो, जिसे पेंशनधारी के मरने के बाद पेंशन की रकम मिल सकेगी। 

केंद्र ने अब इस नियम में बदलाव कर दिया है।  इस नियम के कारण कई मामलों में परिवार के सदस्‍यों द्वारा पेंशनधारक को जान से मार कर अपने नाम पर पेंशन पाने की साजिश की जाती थी। हालांकि इस नियम को बदलने के लिए सरकार को 50 साल का वक्त लगा है। 

हालांकि ऐसा करने की स्थिति में  पुराने नियमों के तहत भी परिवार के सदस्‍यों के लिए कठोर कानूनी सजा का प्रावधान था, लेकिन फिर भी कई लोग इससे बच जाते थे। पुराने नियम के तहत इस तरह के मामले सामने आने के बाद फैमिली पेंशन को सरकार द्वारा ससपेंड कर दिया जाता था और कानूनी कार्रवाई के बाद जब आरोपी को सभी आरोपों से बरी किया जाता था, तब उन्‍हें पुराने एरियर के साथ फैमिली पेंशन को फ‍िर से शुरू किया जाता था। 

इस पूरी न्यायिक प्रक्रिया के दौरान ऐसे कई मामले सालों तक कोर्ट में ही लटके रहते हैं, और इस दौरान परिवार को वित्‍तीय हालात बहुत खराब हो जाते हैं। अब मंत्रालय ने आदेश जारी कर कहा है कि परिवार के सदस्य को पारिवारिक पेंशन नहीं देना गलत है, कानूनी कार्यवाही को अंतिम रूप देने में लंबा समय लगता है, जिसकी वजह से बच्चों और परिवार के बाकी पात्र सदस्यों को पेंशन न मिलने से आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ता है। 

नए नियमों के मुताबिक, ऐसे मामलों में जहां पारिवारिक पेंशन हासिल करने के लिए पात्र व्यक्ति पर सरकारी कर्मचारी की हत्या करने या ऐसा अपराध करने के लिए उकसाने का आरोप लगाया जाता है, उस पर परिवार पेंशन का भुगतान निलंबित रहेगा लेकिन इस संबंध में आपराधिक कार्यवाही समाप्त होने तक परिवार के अन्य पात्र सदस्य को पारिवारिक पेंशन की अनुमति दी जाएगी।

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