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महन्त दिग्विजयनाथ ने गोरक्षपीठ के साथ सनातन धर्म व नाथ सम्प्रदाय के विचारों व आदर्शाें को विकसित किया : सीएम योगी

महन्त दिग्विजयनाथ ने गोरक्षपीठ के साथ सनातन धर्म व नाथ सम्प्रदाय के विचारों व आदर्शाें को विकसित किया : सीएम योगी

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरक्षनाथ मंदिर, गोरखपुर में युगपुरुष ब्रह्मलीन महन्त दिग्विजयनाथ महाराज की 52वीं पुण्यतिथि व महन्त अवेद्यनाथ महाराज की 7वीं पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि महन्त दिग्विजयनाथ ने व्यक्तिगत सुख दुःख की चिंता किये बगैर अपना सम्पूर्ण जीवन धर्म व देश के लिए समर्पित कर दिया। साथ ही, गोरक्षपीठ के साथ सनातन धर्म व नाथ सम्प्रदाय के विचारों व आदर्शाें को विकसित किया। उनका जन्म इतिहास प्रसिद्ध मेवाड़ राजवंश में हुआ था।
 
सीएम योगी ने कहा कि व्यक्ति के अपने संस्कार होते हैं और उसके अनुरूप ही वह आचरण करता है। महन्त दिग्विजयनाथ महाराज ने अपने गुरु के सम्मान की रक्षा के लिए वर्ष 1932 में महाराणा प्रताप स्कूल की स्थापना की थी, जो आगे चलकर महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद बनी। उन्होंने कहा कि इस शिक्षा परिषद के सान्निध्य व गोरक्षपीठ के मार्गदर्शन में आज चार दर्जन शिक्षण व प्रशिक्षण संस्थाएं पूर्वी उत्तर प्रदेश के अनेक जनपदों में शिक्षा, स्वास्थ्य व राष्ट्रीयता के जागरण के अभिनव यज्ञ में लगी हुई हैं।  


सीएम योगी ने कहा कि आजादी के आन्दोलन व आजादी के उपरान्त महन्त दिग्विजयनाथ महाराज ने निरन्तर संघर्ष किया। महन्त दिग्विजयनाथ के संघर्षों के प्रतिबिम्ब उनके व्यक्तित्व व कृतित्व से दृष्टिगोचर होते हैं। स्वाभाविक रूप से उन्होंने गोरक्षपीठ में धार्मिक व आध्यात्मिक शिक्षा के साथ ही, सभ्यता व संस्कृति के विकास हेतु विभिन्न संस्थाओं की स्थापना की। सभ्यता व संस्कृति के उत्थान हेतु पूज्य गुरु महन्त अवेद्यनाथ महाराज के कार्यों से हम सभी को प्रेरणा प्राप्त होती है और आज हम सब उन्हीं का अनुसरण करते हुए आगे बढ़ रहे हैं। साथ ही, गोरक्षपीठ व उनसे सम्बद्ध संस्थाएं निरन्तर कार्य कर रही हैं। महायोगी गुरू गोरक्षनाथ, पूज्य सिद्ध, पूज्य संतों और योगियों की इस परम्परा को निरन्तर आगे बढ़ाने के कार्य किए जा रहे हैं।
   
सीएम योगी ने कहा कि भारत और भारतीय संस्कृति के लिए हर भारतीय को तैयार होना पड़ेगा। आज देश एक नया भारत बनने की ओर अग्रसर है। हर एक क्षेत्र में भारत दुनिया के सामने नये प्रतिमान स्थापित कर रहा है तो स्वाभाविक रूप से प्रत्येक नागरिक को आत्मावलोकन करना होगा। आत्मावलोकन इस बात को लेकर होना चाहिए कि आखिर इस देश की महान संस्कृति के लिए हमारे क्या दायित्व हैं और इन दायित्वों का हम किस प्रकार निर्वहन कर पा रहे हैं। 
 
सीएम योगी ने कहा कि सदियों से दबी-कुचली भावनाओं को देश में अवश्य ही सम्मान मिलना चाहिए व उन्हें प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। हर स्तर पर उन्हें आगे बढ़ाने की आवश्यकता है और केन्द्र व प्रदेश सरकार अपने उन दायित्वों का ईमानदारी पूर्वक निर्वहन कर रही है। उन्होंने कहा कि हमने तो उत्तर प्रदेश में इस बात के लिए कहा कि हर धार्मिक पीठ अपने यहां संस्कृत विद्यालय खोले। सरकार इस कार्य में सहयोग करेगी और हमने तमाम संस्थाओं को कहा कि योग्य संस्कृत शिक्षकों की नियुक्ति करें। उन्होंने कहा कि योग्यता में वृद्धि का कार्य विश्वविद्यालयों, विद्यालयों व आश्रमों को करना होगा। यह विभिन्न संस्थाएं यदि योग्य आचार्य देश को दें तो संस्कृत भाषा और पुष्पित व पल्लवित होगी। 


उन्होंने कहा कि अयोग्यता संस्थानों को नष्ट कर देती है। अतएव योग्य व्यक्ति को तराशने का कार्य प्रत्येक संस्था का होना चाहिए। केवल सरकार के भरोसे 
योग्यता को तराशने का कार्य नहीं होना चाहिए, बल्कि इस कार्य में सभी धर्माचायों, पूज्य संतजनों को इस गुरुत्तर दायित्व का निर्वहन करना होगा, तभी संस्कृत व संस्कृति दोनों की रक्षा होगी। साथ ही, गोरक्षा भी होगी।
  
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि गोवंश की रक्षा के लिए सभी को तत्पर होना होगा। गोवंश की रक्षा हेतु सरकार अपना सहयोग कर रही है। प्रदेश सरकार द्वारा गोवंश की रक्षा व कल्याण के लिए तीन प्रकार की व्यवस्थाएं वर्तमान में संचालित हैं। इनमें गोवंश के रहने व खाने के लिए निराश्रित गोआश्रय स्थलों का निर्माण कराया गया है। इन गोआश्रय स्थलों में लगभग 06 लाख गोवंश संरक्षित हैं। गोवंश की सेवा के लिए सहभागिता योजना चलायी जा रही है, जिसके तहत कोई 
भी किसान अपने घर में चार गोवंश का पालन-पोषण कर सकता है, जिसके लिए प्रति गोवंश 900 रुपये प्रतिमाह सरकार द्वारा कृषक परिवार को उपलब्ध कराया जा रहा है। इस प्रकार 3600 रुपये प्रतिमाह की सहायता सरकार सम्बन्धित परिवार को उपलब्ध करा रही है। तीसरी योजना में कुपोषित बच्चों व माताओं को निराश्रित दुधारु गोवंश को उपलब्ध कराने की व्यवस्था है, जिसके तहत उस परिवार को 900 रुपये प्रतिमाह प्रदान किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि गोवंश संरक्षण व संवर्धन की इन योजनाओं से धार्मिक संगठनों को भी जुड़ना चाहिए।       

सीएम योगी ने कहा कि धर्म की रक्षा तब होगी, जब हम धर्म के मूल को समझें। गोरक्षा भाषणों से नहीं की जा सकती, बल्कि गोमाता के प्रति अपनी श्रद्धा भाव से की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि अपने स्तर पर जितनी व्यवस्था कर सकते हैं, उसे आगे बढ़ाएं। साथ ही, शासन स्तर के प्रयासों से भी जुड़ें और गोरक्षा के आदर्श कार्य को आगे बढ़ाएं। गोमाता हमारी ऊर्जा का स्रोत भी हैं। जैविक खेती के कार्य को गोमाता से जोड़ कर आगे बढ़ाया जा रहा है। यह जुड़ाव हर स्तर पर व हर जगह हो सकता है। सभी को सामूहिक प्रयास करने होंगे। उन्होंने कहा कि इन्हीं मूल्यों के लिए युगपुरुष महन्त दिग्विजयनाथ महाराज ने अपना पूरा जीवन समर्पित किया था। उन्होंने कभी साम्प्रदायिक भेद, जाति भेद नहीं माना। छुआछूत, अष्पृश्यता को समाप्त करने के लिए गोरक्षपीठ के महन्त सदैव कार्यरत रहे।

सीएम योगी ने कहा कि भारत एवं भारतीयता की रक्षा तभी हो सकती है, जब सभी लोग एक साथ आगे बढ़ेंगे। भारत की एकता व अखण्डता के लिए सभी लोगों को जाति, भेद, क्षेत्रवार, भाषावार को त्याग कर एक साथ प्रयास करने होंगे, तभी भारत समर्थ व सुदृढ़ होगा। देश व धर्म को मजबूत करने के लिए गोरक्षपीठ के महन्त दिग्विजयनाथ महाराज व महन्त अवेद्यनाथ महाराज ने अपना अहर्निश योगदान दिया। उन्होंने कहा कि हमें हर हाल में समय रहते 
विसंगतियों को दूर करना होगा। 
 
सीएम योगी ने कहा कि विगत सात दिनों से श्रद्धांजलि सभा कार्यक्रम का आयोजन गोरक्षपीठ समिति की ओर से किया गया है। यह अपने संस्थापकों के प्रति हमारा दायित्व है। अपने पूर्वजों के मूल्यों व आदर्शों को अपने जीवन में अंगीकार करते हुए अपनी आचरण शैली को विकसित करना होगा। उन्होंने कहा कि यह सदाचरण ही हमें वास्तविक रूप से आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। 
 
इस अवसर पर उन्होंने महन्त दिग्विजयनाथ महाराज व महन्त अवेद्यनाथ महाराज को विनम्र श्रद्धांजलि देते हुए तथा सभी सम्मानित संतों, अतिथियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि ‘श्रद्धावान लब्धे ज्ञानम्’ अर्थात श्रद्धा भाव से ही हम जीवन में आगे बढ़ सकते हैं। हमारी श्रद्धा धर्म, संस्कृति, परम्परा, मूल्यों व आदर्शों के प्रति हमारे मन में अनवरत रूप से होनी चाहिए।  

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