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उत्तर प्रदेश और बिहार में बौद्ध सर्किट को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करेगी केंद्र सरकार

उत्तर प्रदेश और बिहार में बौद्ध सर्किट को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करेगी केंद्र सरकार

 सार 
  • पर्यटन मंत्रालय की बोधगया को साल भर के पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना
  • साल 2016 में हुई थी बौद्ध सर्किट परियोजना की घोषणा 
  • अब तक परियोजना के लिए 343 करोड़ रुपये मंजूर किए गए 


नई दिल्ली | भारत विश्व में बौद्ध अनुयाइयों में बुद्ध धर्म की जन्म स्थली मन जाता है। हर साल लाखों की संख्या में सैलानी पूरी दुनिया से बोधगया, नालंदा, राजगीर, वैशाली, सारनाथ, श्रावस्ती, कुशीनगर, कौशाम्बी जैसी जगहों पर आते हैं।  अब भारत सरकार दुनिया में बुध धर्म और उससे जुड़े पर्यटन के लिए इन जगहों पर  विश्व स्तरीय आधारभूत संरचना का निर्माण करना चाहती है।   

मोदी सरकार ने 2016 में बौद्ध सर्किट परियोजना की घोषणा की थी और तभी से उत्तर प्रदेश और बिहार राज्यों में फैले बौद्ध धर्म के कुछ सबसे पवित्र स्थलों को पर्यटन के लिए विक्सित किया जा रहा है।  केंद्र अब तक इस परियोजना के लिए 343 करोड़ रुपयों की मंज़ूरी दे चूका है।  

पर्यटन मंत्रालय की महत्वाकांक्षी स्वदेश दर्शन योजना के तहत, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, गुजरात और आंध्र प्रदेश में कई परियोजनाएं शुरू की गई हैं। ये परियोजनाएं कार्यान्वयन के विभिन्न चरणों में हैं, जिनमें से अधिकांश के लिए सरकार 2022-23 की समय सीमा को पूरा करने पर नजर गड़ाए हुए है। 

इन योजनाओं के तहत बौद्ध सर्किट में आने वाले बोधगया, नालंदा, राजगीर, वैशाली, सारनाथ, श्रावस्ती, कुशीनगर, कौशाम्बी, संकिसा और कपिलवस्तु को और विकसित करने की योजना है। केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय ने बोधगया को एक प्रमुख बौद्ध तीर्थ स्थल के रूप में साल भर पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना बनाई है और आवश्यक बुनियादी ढांचे और सुविधाओं को स्थापित करने के प्रयास किया जा रहा है ।  

इसी कड़ी में मंगलवार को बोधगया में पर्यटन पर एक सम्मेलन आयोजित किया गया जिसमें पर्यटन महानिदेशक जी. कमला वर्धन राव के साथ केंद्रीय और राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया । इस मौके पर राव ने कहा कि सरकार बौद्ध धर्म से संबंधित पर्यटन स्थलों के विकास के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा कि दुनिया भर से पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए यहां कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने की जरूरत है, जिस पर सरकार काम कर रही है। महाबोधि मंदिर परिसर बोधगया में स्थित है। बुद्ध को यहां एक पवित्र बोधि वृक्ष के नीचे ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। सम्मेलन बुनियादी ढांचे के विकास और हवाई, रेल और सड़क संपर्क को बढ़ावा देने पर केंद्रित था। पर्यटन मंत्रालय, विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों और बिहार और उत्तर प्रदेश की राज्य सरकारों के सहयोग से बौद्ध पर्यटन सर्किट विकसित कर रहा है।

भारत में कुल विदेशी पर्यटन का लगभग 6 फ़ीसदी हिस्सा इन स्थलों की वजह से ही है, जिसमें सारनाथ और बोधगया प्रमुख हैं। फिलहाल बोधगया में एक सांस्कृतिक केंद्र का निर्माण भी चल रहा है।

केंद्र अब पूरी दुनिया को बौद्ध धर्म देने में भारत के महत्व पर ध्यान आकर्षित करना चाहता है।  इसके लिए भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) भी अगले महीने एक 'वैश्विक बौद्ध सम्मेलन' का आयोजन कर रहा है। इस सम्मलेन में दुनिया भर से बौद्ध अनुयाई और बौद्ध धर्म के अध्ययन में लगे बुद्धिजीवी हिस्सा लेंगे। इस सम्मलेन को 'साहित्य में बौद्ध धर्म' विषय पर आयोजित किया जाएगा।