होम > भारत

आखिर केंद्र सरकार कॉलेजियम सिस्टम में अपने प्रतिनिधि क्यों करना चाहती है शामिल

आखिर केंद्र सरकार कॉलेजियम सिस्टम में अपने प्रतिनिधि क्यों करना चाहती है शामिल

केंद्रीय कानून मंत्री किरण रिजिजू ने एक चिठ्ठी सीजेआई को लिखी जिसमे सरकार की तरफ से सुप्रीम कोर्ट को सलाह दी गई है कि कॉलेजियम सिस्टम में सरकार के प्रतिनिध शामिल किये जाए जिससे जनता के प्रति जवाबदेही तथा इस व्यवस्था में और ज्यादा पारदर्शिता आ सके।


पिछले साल उठा था पारदर्शिता का मुद्दा

कॉलेजियम सिस्टम में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी का मुद्दा कानून मंत्री ने 2022 में उठाया था उन्होंने कहा था कि SC तथा HC में जजों की नियुक्ति में सम्बंधित सरकार के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाये, उन्होंने कहा था कि जजों की नियुक्ति का अधिकार सरकार का है तथा देश में करोड़ों केस लंबित है इसका मुख्य कारण नियुक्ति से है।


क्या है कॉलेजियम प्रणाली

कॉलेजियम सिस्टम सुप्रीम कोर्ट तथा हाई कोर्ट में जजों को नियुक्ति तथा स्थानांतरण के लिए एक व्यवस्था है इसके सदस्य जज होते हैं जो जजों की नियुक्ति से सम्बंधित नाम प्रधानमंत्री तथा राष्ट्रपति को भेजते हैं तथा सरकार से मंजूरी मिलने की बाद जजों की नियुक्ति की जाती है, वर्तमान समय में सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम में पांच जज हैं इनमे मुख्य न्यायाधीश प्रमुख हैं तथा अन्य चार वरिष्ठ न्यायाधीश हैं।


क्या हो सकता है SC का पक्ष

सुप्रीम कोर्ट राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग एक्ट को 2015 में ही रद्द कर चुका है ऐसे में कानून मंत्री का यह पत्र NJAC जैसी प्रणाली के लिए माना जा सकता है, सुप्रीम कोर्ट की तरफ से कहा गया कि कॉलेजियम सिस्टम को लेकर टिप्पणी करना सही नहीं है तथा हर भारतीय को कानून का पालन करना चाहिए।