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एसजेवीएन ने 2040 तक 50,000 मेगावाट की कंपनी बनने का रखा लक्ष्य

एसजेवीएन ने 2040 तक 50,000 मेगावाट की कंपनी बनने का रखा लक्ष्य

सार्वजनिक क्षेत्र की उपक्रम एसजेवीएन ने 2040 तक 50000 मेगावाट कंपनी बनने का लक्ष्य रखा है, जिसमें रिन्यूएबल पोर्टफोलियो को कई गुना बढ़ाया जाएगा। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने एक महत्वाकांक्षी अक्षय ऊर्जा लक्ष्य निर्धारित किया है जो 2022 तक 175 GW और 2030 तक 500 GW है। उसी के आधार पर, SJVN का लक्ष्य 2023 तक 5000 MW और 2030 तक 25000 MW की कंपनी बनने का है।

एसजेवीएन के सीएमडी नंद लाल शर्मा ने मीडियाकर्मियों को संबोधित करते हुए बताया कि एसजेवीएन पूरे भारत में सोलर, विंड, हाइब्रिड, फ्लोटिंग सोलर, ओशन हाइब्रिड प्लेटफॉर्म स्थापित करने के अवसरों की लगातार तलाश कर रहा है। ये अवसर आम तौर पर प्रतिस्पर्धी बोली (कॉम्पिटिटिव बिडिंग) प्रक्रियाओं के रूप में होते हैं। उन्होंने कहा कि लक्ष्य को आगे बढ़कर एसजेवीएन का लक्ष्य 2047 तक 60,000 मेगावाट की कंपनी बनना है।

उन्होंने कहा कि एसजेवीएन ने एक राज्य में एक परियोजना संचालन के साथ शुरुआत की थी, लेकिन आज यह भारत के ग्यारह राज्यों में बिजली परियोजनाओं को इम्प्लीमेंट कर रहा है और पड़ोसी देशों जैसे नेपाल और भूटान में भी परियोजनाओं को लागू करके अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कदम रखा है।

उन्होंने कहा कि एसजेवीएन की वर्तमान स्थापित क्षमता 2016.51 मेगावाट (1912 मेगावाट हाइड्रो; 97.6 मेगावाट पवन ऊर्जा और 6.91 मेगावाट सौर ऊर्जा के साथ) और 86 किमी 400 केवी ट्रांसमिशन लाइन है। इसके अलावा, अरुण-3 एचईपी ट्रांसमिशन लाइन से एक और 217 किमी की लाइन निर्माणाधीन है, जबकि कंपनी ने हिमाचल प्रदेश में 210 मेगावाट लुहरी एचईपी और 66 मेगावाट धौलासिद्ध एचईपी के लिए ट्रांसमिशन लाइनों के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।

उन्होंने कहा कि वर्तमान में एसजेवीएन का कुल परियोजना पोर्टफोलियो 41,028 मेगावाट है और कंपनी का लक्ष्य वित्तीय वर्ष 2022-23 के लिए 8,000 करोड़ रुपये के कैपेक्स लक्ष्य को प्राप्त करना है।