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अमृता शेरगिल भारत की एक प्रसिद्ध चित्रकार

अमृता शेरगिल भारत की एक प्रसिद्ध चित्रकार

मृता शेरगिल हंगेरियन-भारतीय चित्रकार थीं। हंगेरियन इसलिए क्यूंकि इनका जन्म 30 जनवरी 1913 बुडापेस्ट, हंगरी में हुआ था। उन्हें "20वीं शताब्दी की शुरुआत की सबसे महान अवंत-गार्डे महिला कलाकारों में से एक" और आधुनिक भारतीय कला में "अग्रणी" कहा गया है। उन्होंने बहुत कम उम्र से ही पेंटिंग की और आठ साल की उम्र में कला में औपचारिक सबक लेना शुरू कर दिया था। उन्होंने पहली बार 19 साल की उम्र में यंग गर्ल्स (1932) शीर्षक से अपनी ऑइल पेंटिंग के लिए पहचान हासिल की।

शेरगिल ने अपने चित्रों में लोगों के दैनिक जीवन का चित्रण किया है। उनके पिता उमराव सिंह शेर-गिल मजीठिया-एक भारतीय पंजाबी सिख अभिजात और संस्कृत व फ़ारसी के विद्वान तथा माता मैरी एंटोनेट गोट्समैन- एक हंगेरियन-यहूदी ओपेरा गायिका, जो भारत से आई थीं। अमृता शेरगिल एक संपन्न बुर्जुआ परिवार से थी। अमृता ने अपने पूरे जीवन में तुर्की, फ्रांस और भारत सहित विभिन्न देशों की यात्रा की, जो पूर्व-औपनिवेशिक भारतीय कला शैलियों और इसकी वर्तमान संस्कृति से बहुत अधिक प्रभावित हुए। वह एक उत्साही पाठक और पियानोवादक भी थीं। शेर-गिल की पेंटिंग आज भारतीय महिला चित्रकारों द्वारा सबसे महंगी हैं, हालांकि कुछ लोगों ने उनके काम को स्वीकार किया जब वह जीवित थीं।

1921 में वो अपने परिवार के साथ शिमला में आकर बस गयी। अमृता ने जल्द ही पियानो और वायलिन सीखना शुरू कर दिया। 1923 में, मैरी को एक इतालवी मूर्तिकार के बारे में पता चला, जो उस समय शिमला में रह रहा था। 1924 में, जब वे इटली लौटे, तो वह भी अमृता के साथ वहाँ चली गईं, और उनका दाखिला फ़्लोरेंस के एक कला विद्यालय, सांता अन्नुंजियाता में करा दिया। हालांकि अमृता लंबे समय तक इस स्कूल में नहीं रहीं और 1924 में भारत लौट आईं, यहीं पर उन्हें इतालवी आचार्यों के कामों से अवगत कराया गया।

अमृता के पति का नाम विक्टर एगन था। 1932-1936 तक शेर-गिल की प्रारंभिक पेंटिंग यूरोपीय और पश्चिमी शैली का एक महत्वपूर्ण प्रभाव प्रदर्शित करती हैं। शेरगिल की 1937-1941 तक की पेंटिंग में भारतीय कला का प्रभाव देखने को मिलता है। भारत सरकार ने उनकी कृतियों को राष्ट्रीय कला कोष घोषित किया है और उनमें से अधिकांश को नई दिल्ली के राष्ट्रीय आधुनिक कला संग्रहालय दीर्घा में रखा गया है। शेरगिल की कला ने सैयद हैदर रज़ा से अर्पिता सिंह तक भारतीय कलाकारों की पीढ़ियों को प्रभावित किया है।