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7,523 करोड़ रुपये की युद्धक टैंक खरीद से रक्षा क्षेत्र में मेक इन इंडिया पहल को मिलेगा बढ़ावा

7,523 करोड़ रुपये की युद्धक टैंक खरीद से रक्षा क्षेत्र में मेक इन इंडिया पहल को मिलेगा बढ़ावा

नई दिल्ली। रक्षा मंत्रालय ने भारतीय सेना के लिए चेन्न ई में अवाडी स्थित भारी वाहन कारखाने को एक सौ 18 मुख्य् युद्धक टैंक, अर्जुन एमके-1ए की आपूर्ति का ऑडर्र दिया है। 7,523 करोड़ रुपये की इस खरीद से रक्षा क्षेत्र में मेक इन इंडिया पहल को बढ़ावा मिलेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 14 फरवरी को टैंक- अर्जुन एमके-1ए को चेन्नरई में सेना प्रमुख जनरल मनोज नरवणे को सौंपा था। यह आधुनिक टैंक, अर्जुन टैंक का नया प्रारूप है। 72 नई विशेषताओं वाला और अधिक स्व देशी सामग्री से बना यह टैंक सभी क्षेत्रों में दिन-रात लक्ष्यम पर हमला कर सकता है। इसका विकास रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन-डीआरडीओ ने किया है।
अत्याधुनिक एमबीटी एमके-1ए अर्जुन टैंक का एक नया संस्करण है जिसे फायर पावर, गतिशीलता और युद्ध क्षेत्र में बने रहने की सामर्थ्य में बढ़ोतरी के लिहाज से डिज़ाइन किया गया है । कुल 72 नई विशेषताओं और अधिक स्वदेशी सामग्री के साथ एमके-1 वैरिएंट दिन और रात के दौरान लक्ष्य पर सटीक वार करने की काबिलियत के अलावा सभी इलाकों में सहज गतिशीलता सुनिश्चित करेगा। इसे रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा भारतीय सेना के साथ सेवा में मुख्य युद्धक टैंक अर्जुन एमबीटी में अनेक प्रकार के उन्नयन कर डिजाइन और विकसित किया गया है।
एमके-1ए सटीक और बेहतर मारक क्षमता, सभी इलाकों में गतिशीलता और उन्नत प्रौद्योगिकी प्रणालियों की श्रृंखला द्वारा प्रदान की जाने वाली एक अजेय बहुस्तरीय सुरक्षा से लैस है । यह दिन और रात की परिस्थितियों में और स्थिर और गतिशील दोनों मोड में दुश्मन से मुकाबला कर सकता है।  इन क्षमताओं के आधार पर, यह स्वदेशी एमबीटी दुनिया भर में अपने वर्ग के किसी भी समकालीन टैंक के बराबर साबित होता है। यह टैंक विशेष रूप से भारतीय परिस्थितियों के लिए कॉन्फ़िगर और डिज़ाइन किया गया है और इसलिए यह प्रभावी तरीके से सीमाओं की रक्षा के लिए तैनाती हेतु उपयुक्त है।
एचवीएफ, अवड़ी को यह उत्पादन आदेश एमएसएमई सहित 200 से अधिक भारतीय विक्रेताओं के लिए रक्षा निर्माण में बड़े अवसर खोलता है, जिसमें लगभग 8,000 लोगों को रोजगार के अवसर प्राप्त होते हैं।  यह अत्याधुनिक रक्षा प्रौद्योगिकियों में स्वदेशी क्षमता का प्रदर्शन करने वाली एक प्रमुख परियोजना होगी।
एमबीटी अर्जुन एमके-1ए को दो साल (2010-12) के भीतर डीआरडीओ की अन्य प्रयोगशालाओं के साथ कॉम्बैट व्हीकल रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टाब्लिशमेंट (सीवीआरडीई) द्वारा डिजाइन और विकसित किया गया है।  जून 2010 से विकास गतिविधियां शुरू हुईं और जून 2012 में टैंक को उपयोगकर्ता परीक्षणों के लिए मैदान में उतारा गया। 
उपयोगकर्ता की आवश्यकता से उपयोगकर्ता परीक्षणों के लिए एमबीटी अर्जुन एमके -1 ए को विकसित करने और क्षेत्र में लाने में केवल दो साल लगे। वर्ष 2012-2015 के दौरान अनेक चरणों में 7000 किलोमीटर (डीआरडीओ और उपयोगकर्ता परीक्षणों दोनों में) कवर करते हुए विभिन्न प्रकार के गोलाबारूद की ऑटोमोटिव व पर्याप्त फायरिंग के व्यापक परीक्षण मूल्यांकन संचालित किए गए।

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