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पूर्वी लद्दाख में भारतीय सीमा के पास चीनी सेना ने किया रात्रि युद्धाभ्यास

पूर्वी लद्दाख में भारतीय सीमा के पास चीनी सेना ने किया रात्रि युद्धाभ्यास

नई दिल्ली | भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में मई 2020 में असल नियंत्रित सीमा को लेकर उठे विवाद के बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक सम्बन्ध (Bilateral Relations) बेहद नाज़ुक हो गए हैं। हालांकि दोनों देशों की सेनाओं ने एलऐसी पर तनाव को कम करने के लिये पीछे हटने का फैसला किया था लेकिन सोमवार रात चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (People's liberation Army) ने पूर्वी लद्दाख में रात्रि युद्धाभ्यास किया है। 

गौरतलब है की देशों के बीच सीमा विवाद को हल करने के लिए चल रही सैन्य और कूटनीतिक बातचीत के बीच भारतीय सीमा के पास झिंजियां की 16,000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर चीनी सेना ने ये रात्रि युद्धाभ्यास किया। सूत्रों के अनुसार पश्चिमी थिएटर कमांड ने हाल ही में अपनी क्षमताओं को बढ़ाने के लिए रात्रि युद्ध अभ्यास किया। चीनी सेना की थिएटर कमांड झिंजियांग और तिब्बत स्वायत्त क्षेत्रों के साथ-साथ भारत के साथ लगती सीमा की देखरेख करती है, जिससे यह पीएलए में एक कमांड के तहत सबसे बड़ा भौगोलिक क्षेत्र बन जाता है।

इस साल की शुरुआत में, चीन तिब्बत सैन्य क्षेत्र से शिनजियांग क्षेत्र में सैनिकों को लेकर आया था, जो दक्षिण उत्तराखंड में काराकोरम र्दे के क्षेत्र की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार है। इसके अलावा, उन्होंने बड़ी संख्या में लंबी दूरी की तोपें तैनात की हैं और वे तिब्बती पठार पर तेजी से बुनियादी ढांचे का निर्माण कर रहे हैं।

इन सैनिकों को लाए जाने के बाद, पीएलए (PLA) ने क्षेत्र में सैन्य अभ्यास करना शुरू कर दिया है।

इसके अलावा, चीन ने तिब्बती पठार में अपने मौजूदा हवाई क्षेत्रों का नवीनीकरण किया है, जो दो इंजन वाले लड़ाकू विमानों को तैनात करने की अनुमति देगा। वे वर्तमान में सैन्य परिवहन के लिए झिंजियांग और तिब्बत में निर्मित या निमार्णाधीन 30 हवाई अड्डों में सुधार कर रहे हैं।

चीन ने तिब्बत में बुनियादी ढांचे में सुधार किया है और इस दिशा में काम करते हुए प्रांतीय राजधानी ल्हासा को अरुणाचल प्रदेश के करीब तिब्बती सीमावर्ती शहर निंगची से जोड़ने वाली एक हाई-स्पीड बुलेट ट्रेन शुरू की है।

पिछले साल भारत के साथ झड़पों के बाद चीनी वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर सैन्य बुनियादी ढांचे को भी तेजी से बढ़ा रहे हैं। भारत ने भी लगभग 50,000 सैनिकों को पुनर्निर्देशित किया है जिनका मुख्य ध्यान अब चीन के साथ विवादित सीमा पर है। दोनों देशों ने बातचीत के जरिए इस मुद्दे को सुलझाने का फैसला किया है।

पिछले महीने, एक और बड़ी सफलता में भारत और चीन ने पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर गोगरा में संघर्ष बिंदु (Friction Point), पैट्रोलिंग प्वाइंट (patrolling POint) 17 से सैनिकों को पीछे हटा लिया था।

दोनों देशों ने चरणबद्ध, समन्वित और सत्यापित तरीके से इस क्षेत्र में अग्रिम तैनाती बंद कर दी है। भारतीय सैन्य प्रतिनिधि अपने चीनी समकक्षों से मिलेंगे और अन्य संघर्ष वाले क्षेत्र, डेपसांग मैदानी इलाके में भी सैनिकों को पीछे हटाने के लिए बातचीत करेंगे। भारत ने हाल ही में सैन्य कमांडर की बैठकों के दौरान असल नियंत्रित सीमा (line of actual control) के सभी मुद्दों को हल करने पर जोर दिया है।

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