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सांसदों के निलंबन पर कांग्रेस ने साधा भाजपा पर निशाना, बताया लोकतंत्र के खिलाफ

सांसदों के निलंबन पर कांग्रेस ने साधा भाजपा पर निशाना, बताया लोकतंत्र के खिलाफ

नई दिल्ली | कांग्रेस ने शीतकालीन सत्र के सातवें दिन 12 सांसदों के निलंबन पर एक बार फिर एक दिन के लिए वॉकआउट कर कहा भारत के प्रजातंत्र को सरकार बाधित कर रही है। राज्यसभा में कांग्रेस के उपनेता आनंद शर्मा ने बुधवार को प्रेसवार्ता कर कहा, भारत के प्रजातंत्र को सरकार रोक (अवरोध) रही है। देश के प्रजातंत्र को दबाया जा रहा है, कुचल जा रहा है और जो सरकार के कथन है वो विपक्ष को बदनाम करने का है।

उन्होंने कहा कि सरकार ये बता रही है कि गलती विपक्षी दलों की है, ये बिलकुल गलत है। ये भारत के संसद के इतिहास में 1992 से लेकर आजतक नहीं हुआ। पिछले सत्र (मानसून सत्र) की घटना पर अगले सत्र (शीतकालीन सत्र) में सजा दी जाये। ये गलत है। ये संविधान के नियमों का भी उल्लंघन करता है। सरकार केवल बिना चर्चा बिल पास करना चाहती है। नैतिकता के आधार पर हमारी कोई सुनवाई ही नहीं है। ये प्रधानमंत्री मोदी की जिम्मेवारी है कि सत्र ठीक ढंग से चले।

वहीं राज्यसभा में नेता विपक्ष मल्लिकार्जुन खड्गे ने कहा, हम बहुत बार ये बिनती कर चुके हैं कि हमने कोई गलती नहीं की है, फिर भी ये सरकार अपने निर्णय पर अड़ी हुई है। हम सभी पार्टी के लोग हाऊस बॉयकॉट कर के पूरे दिन उनका (12 निलंबित सांसदों का) साथ दे रहे हैं। हाउस में जो कार्यवाही चल रही है। हम उसको बॉयकॉट करते हैं। नागालैंड का मसला, चीन का मसला सभी मुद्दों को हम सरकार के समक्ष उठाना चाहते हैं।

दरअसल पिछले सप्ताह सोमवार को यानी 29 नवंबर को शीतकालीन सत्र के पहले दिन ही राज्यसभा में कांग्रेस, शिवसेना और तृणमूल कांग्रेस सहित कई अन्य विपक्षी दलों के 12 सदस्यों को इस सत्र की शेष अवधि के लिए उच्च सदन से निलंबित कर दिया गया था। जिन सदस्यों को निलंबित किया गया है। उनमें मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के इलामारम करीम, कांग्रेस सांसद फूलों देवी नेताम, छाया वर्मा, रिपुन बोरा, राजमणि पटेल, सैयद नासिर हुसैन, अखिलेश प्रताप सिंह, तृणमूल कांग्रेस की डोला सेन व शांता छेत्री। वहीं शिव सेना सांसद प्रियंका चतुर्वेदी और अनिल देसाई व भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के विनय विस्वम शामिल हैं।