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लखनऊ समेत देश के तमाम बड़े शहरों में इस बार कुछ यूँ मनाया जायेगा दशहरा

लखनऊ समेत देश के तमाम बड़े शहरों में इस बार कुछ यूँ मनाया जायेगा दशहरा

नई दिल्ली। इस बार दशहरा 15 अक्टूबर को मनाया जाएगा। दशहरा के दिन खासकर बच्चे रावण दहन देखने के लिए बेसर्बी से इन्तजार करते हैं। लेकिन पिछले 2 सालों से करोना वायरस की वजह से रावण दहन नहीं हुआ जिसे लेकर बच्चे इस साल दशहरा का बड़ी बेसर्बी से इन्तजार कर रहे हैं। इस वर्ष कोरोना वायरस की वजह से कई जगहों पर सख्त गाइलाइन जारी की गई है। ऐसे में देखते हैं कि देश के तमाम बड़े शहरों में दशहरे की क्या तैयारी है... 

लखनऊ में पिछले 400 सालों से दशहरे का त्योहार ऐशबाग में मनाया जाता है। कोरोना वायरस के चलते इस बार जो मंचन है वो ऑनलाइन आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रमों को आयोजन की रामलीला यूट्यूब फेसबुक और वेबसाइट पर ही दिखाई जा रही है। इस बार कोरोना की गाइडलाइन होने के कारण सिर्फ रावण ही बनाया जाएगा और मेघनाथ और कुंभकरण का पुतला बनाया जाएगा।

दशहरे को लेकर मध्य प्रदेश शासन ने दिशा-निर्देश जारी किया है। जिसके तहत  रावण दहन के पहले होने वाले श्रीराम के चल समारोह को प्रतीकात्मक रूप से निकालने की मंजूरी दी हई है। रावण दहन कार्यक्रम के लिए आयोजन समिति को जिला कलेक्टर से पहले अनुमति लेनी होगी। यह अनुमति खुले मैदान, फेस मास्क का इस्तेमाल और सोशल डिस्टेंसिंग की शर्तों पर ही दी जाएगी। मध्य प्रदेश में रावण दहन मैदान की क्षमता के 50 प्रतिशत ही लोग आ सकेंगे।

राजस्थान सरकार ने दशहरा के कुछ दिन पहले गरबा और डांडिया खेलने वालों को राहत देते हुए इसके आयोजनों की छूट दे दी है। राजस्थान सरकार ने ऐलान किया है कि डांडिया और गरबा खेलने के लिए 200 लोग धार्मिक आयोजनों में शामिल हो सकते हैं। हालांकि, इसके लिए वैक्सीन की पहली डोज की शर्त अनिवार्य है। हालांकि, राजस्थान में रावण दहन को लेकर प्रतिबंध जारी रहेगा।

कोटा में हमेशा से रावण का का पुतला 100 फीट के लगभग बनाया जाता रहा है। लेकिन इस बार लेकिन इस बार नगर निगम की ओर से कोटा में प्रतीकात्मक रावण दहन किया जाएगा। इस बार कोटा में रावण का पुतला 20 से 25 फीट का ही बनाया जाएगा। इस बार कोटा में रावण दहन के दौरान चुनिंदा लोगों की उपस्थिति रहेगी। दशहरा के दिन लगने वाले मेले की मंजूरी नहीं होगी।

विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरे की रस्में जैसे-जैसे पास आ रही हैं, वैसे ही वैसे प्रशासन की मुश्किलें भी बढ़ने लगी हैं। हांलाकि, कोरोना नियमों के तहत ही सभी रस्मों को पूरा किया जा रहा है, लेकिन बस्तर के आराध्य पर्व होने से ग्रामीणों और शहरवासियों की मौजूदगी बड़ी संख्या में हो रही है। प्रशासन कोरोना को देखते हुए बैनर पोस्टर से रोकथाम के लिए प्रचार-प्रसार कर रहा है। जिला प्रशासन ने गरबा और दुर्गा पंडालों को रात दस बजे तक ही संचालन की मंजूरी दी है।

बता दें, बस्तर में रावण दहन नहीं किया जाता है। बस्तर दशहरा पर्व में चलने वाले रथ परिक्रमा, निशा जात्रा, भीतर रेनी, बाहर रेनी, मावली परघाव और मुरिया दरबार जैसे प्रमुख रस्मों में सीमित लोगों के शामिल होने की अनुमति दी है। मगर बस्तर के प्रमुख पर्व होने के चलते लोग पर्व को मनाने उमड़ रहे हैं।

कुल्लू में इस इस बार अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव लगभग 50 साल पुराने रूप में नजर आएगा। इस बार दशहरा के दौरान  न तो व्यापारिक गतिविधियां होंगी और न ही सांस्कृतिक कार्यक्रम। सिर्फ देवी-देवता और उनके रथ ही ढालपुर मैदान की शोभा बढ़ाएंगे। इस बार प्रशासन ने कोरोना वायरस की बंदिशों से बिना व्यवसायिक गतिविधियों व सांस्कृतिक कार्यक्रमों के मेला आयोजित करने का फैसला लिया है।

(मेधज न्यूज़ / श्री राम शॉ)  

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