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आरआईएल के अनुसार भारत में 10 वर्षों में हाइड्रोजन क्षेत्र में $150 बिलियन का निवेश हो सकता है

आरआईएल के अनुसार भारत में 10 वर्षों में हाइड्रोजन क्षेत्र में $150 बिलियन का निवेश हो सकता है

आरआईएल के एक अधिकारी के अनुसार भारत हाइड्रोजन के क्षेत्र में अपार अवसर प्रदान करता है और इसमें  150 अरब अमेरिकी डॉलर तक के निवेश होने  की संभावना है। कपिल माहेश्वरी  (रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के अध्यक्ष, न्यू एनर्जी ) ने बीएनईएफ शिखर सम्मेलन के मौके पर कहा कि इस उद्योग में लाखों रोजगार के अवसर पैदा करने की क्षमता है।

हाइड्रोजन क्षेत्र की निवेश क्षमता के बारे में उन्होंने कहा, "अवसर मौजूद हैं। हम (भारत) पहले से ही 6-7 मिलियन टन का बाजार हैं जो छोटा नहीं है। 10 वर्षों में, 150-200 बिलियन डॉलर आ सकते हैं ( निवेश के रूप में) ) और लाखों नौकरियां पैदा होंगी।"

इससे पहले, 'इंडियाज हाइड्रोजन ऑपर्च्युनिटी' पर एक पैनल चर्चा में उद्योग जगत की हस्तियों  ने भारत में हाइड्रोजन की मांग पैदा करने के लिए सरकार द्वारा "जुर्माना और करों" के रूप में कुछ उपाय करने पर जोर दिया।

माहेश्वरी ने कहा, "बाजार द्वारा इसे अपनाने तक सरकार को दायित्वों, कार्बन करों, जुर्माना करों को लगाकर हाइड्रोजन की मांग के निर्माण के बारे में कुछ करना चाहिए।"

माहेश्वरी ने आगे कहा, "ऐसी नीतियां बनाएं जो निश्चित हों। नीतियों या परिवर्तनों में कोई अनिश्चितता नहीं है ताकि एक निवेशक को विश्वास हो जाए कि मैं यहीं निवेश कर रहा हूं और मुझे निवेश पर मेरा रिटर्न मिलेगा।"

नरेश लालवानी ,जेएसडब्ल्यू स्टील के रणनीति, योजना और परिश्रम के प्रमुख ने कहा कि हाइड्रोजन के पारिस्थिति की तंत्र के निर्माण के लिए सार्वजनिक धन की आवश्यकता है। उत्पादन और हाइड्रोजन की लागत पर ध्यान देने की जरूरत है जो वर्तमान में 3-4 डॉलर प्रति किलोग्राम है। हाइड्रोजन का उत्पादन कम लागत पर करने के लिए प्रौद्योगिकियों को विकसित बनाया जाना चाहिए।

स्टील के निर्माण में हाइड्रोजन के उपयोग पर बोलते हुए, उन्होंने कहा, "अगर हाइड्रोजन का उपयोग करके स्टील का उत्पादन 3-4 अमरीकी डालर प्रति किलोग्राम पर किया जाता है, तो स्टील की कीमत छह गुना बढ़ जाएगी।"