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भारत ने 2021 में रिन्यूएबल क्षेत्र में जोड़ी गयी एनर्जी में विश्व स्तर पर पाया तीसरा स्थान

भारत ने 2021 में रिन्यूएबल क्षेत्र में जोड़ी गयी एनर्जी में विश्व स्तर पर पाया तीसरा स्थान

कोविड -19 महामारी के मद्देनजर दुनिया भर में हरित सुधार के वादे के बावजूद, यह ऐतिहासिक अवसर खो दिया गया है, लेकिन एक रिपोर्ट के अनुसार भारत 2021 में 15.4 GW के साथ कुल अक्षय ऊर्जा क्षमता वृद्धि के लिए विश्व स्तर पर तीसरे स्थान पर है, जिसमे चीन 136 गीगावॉट के साथ पहले और यूएस 43 गीगावॉट के साथ दूसरे स्थान पर है ।

REN21 की नवीकरणीय 2022 वैश्विक स्थिति रिपोर्ट (GSR 2022) द्वारा एक स्पष्ट चेतावनी दी गयी है कि वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण नहीं हो रहा है, जिससे कि दुनिया इस दशक में महत्वपूर्ण जलवायु लक्ष्यों को पूरा करने में सक्षम होगी भी या नहीं यह संभावना भी मुश्किल है। 2021 की दूसरी छमाही में इतिहास में सबसे बड़े ऊर्जा संकट की शुरुआत देखी गई, जो रूसी संघ के यूक्रेन पर आक्रमण के शुरुआती और अभूतपूर्व वैश्विक कमोडिटी झटके से बढ़ी।

REN 21 के कार्यकारी निदेशक राणा अदीब ने बताया, "हालांकि कई और सरकारें भी 2021 में शून्य ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के लिए प्रतिबद्ध थी पर वास्तविकता यह है कि, ऊर्जा संकट से बचाव में, अधिकांश देश जीवाश्म ईंधन के नए स्रोतों की तलाश में और अधिक कोयला, तेल और प्राकृतिक गैस जलाने वाले विकल्प की ओर वापस चले गए हैं, "

रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने 2021 में 843 मेगावाट की पनबिजली क्षमता जोड़ी, जिससे कुल क्षमता बढ़कर 45.3 गीगावॉट हो गई। भारत नई सौर पीवी क्षमता के लिए एशिया का दूसरा सबसे बड़ा बाजार था और विश्व स्तर पर तीसरा (2021 में 13 गीगावॉट अतिरिक्त), यह पहली बार जर्मनी (59.2 GW) को पछाड़ते हुए कुल स्थापना (60.4 GW) में चौथे स्थान पर रहा।

पवन ऊर्जा (40.1 GW) की कुल स्थापित क्षमता के मामले में भारत चीन, अमेरिका और जर्मनी के बाद विश्व स्तर पर तीसरे स्थान पर है।