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हैदराबाद हाउस में भारत-बांग्लादेश के बीच हुए कई अहम समझौते

हैदराबाद हाउस में भारत-बांग्लादेश के बीच हुए कई अहम समझौते

बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना चार दिवसीय भारत दौरे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से दिल्ली स्थित हैदराबाद हाउस में मुलाकात की। दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों के बीच इस अहम मुलाकात  के दौरान कई मुद्दों पर चर्चाएं हुई व महत्वपूर्ण समझौते भी हुए।  इसके अलावा वाटर मैनेजमेंट, रेलवे, साइंस और टेक्नोलॉजी से  जुड़े क्षेत्र में भी कई समझौते किए गए।

दोनों देशों के बीच IT, अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा जैसे सेक्टर्स में सहयोग बढ़ाने का निश्चय किया गया हैं, इस दौरान कुशियारा नदी से जल बंटवारे पर एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए गए, पीएम मोदी ने भारत और बांग्लादेश के फ्यूचर विजन पर अपनी राय भी दी।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि द्विपक्षीय व्यापार तेजी से बढ़ रहा है, बांग्लादेश के निर्यात के लिए भारत एशिया में सबसे बड़ा मार्केट है, हम जलवायु  परिवर्तन और सुंदरवन जैसी साझा धरोंहरों को संरक्षित रखने पर बात करेंगे।

पीएम मोदी ने कहा कि पिछले वर्ष हमने बांग्लादेश की स्वतंत्रता की 50वीं वर्षगांठ, हमारे डिप्लोमैटिक संबंधों की स्वर्ण जयंती, शेख मुजीबुर्रहमान की जन्म शताब्दी एक साथ मनाई थी, मुझे विश्वास है कि अगले 25 साल के अमृत काल में बार-बांग्लादेश की मित्रता नई ऊंचाईयां छुएगी। 

प्रधानमंत्री ने आजादी के अमृत महोत्सव के दौरान शेख हसीना की भारत यात्रा को अगले 25 सालों के अमृत काल के दौरान भारत-बांग्लोदश मित्रता नई ऊंचाईयों को छूएगी। आज बांग्लादेश भारत का सबसे बड़ा डेवलपमेंट पार्टनर और क्षेत्र में हमारा सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर है, हमारे घनिष्ठ सांस्कृतिक और पीपल टू पीपल संबंधों में भी निरंतर वृद्धि हो रही है।

प्रधानमंत्री मोदी ने IT, अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा जैसे सेक्टर्स में भी सहयोग बढ़ाने का निश्चय किया, जिसमें हमारी युवा पीढ़ी रूचि रखतीं हैं, आज हमने कुशियारा नदी से जल बंटवारे पर एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं,  इससे भारत में दक्षिणी असम और बांग्लादेश में सिलहट क्षेत्र को लाभ होगा।

 

ऐसी 54 नदियां जो भारत-बांग्लादेश सीमा से गुजरती हैं, तथा दोनों देशों के लोगों की आजीविका से जुड़ी रही हैं, इनके बारे में लोक कहानियां, लोक-गीत, हमारी साझा सांस्कृतिक विरासत के भी साक्षी रहे हैं।

दोनों देशों ने मिलकर आतंकवाद और कट्टरवाद के खिलाफ सहयोग पर भी जोर दिया,1971 की स्प्रिट को जीवंत रखने के लिए भी यह बहुत आवश्यक है कि हम ऐसी शक्तियों का मिल कर मुकाबला करें, जो हमारे आपसी विश्वास पर आघात करना चाहती हैं।