होम > भारत

अध्यक्ष ओम बिरला : यहां से निकले नेताओं ने देश का गौरव बढ़ाया

अध्यक्ष ओम बिरला : यहां से निकले नेताओं ने देश का गौरव बढ़ाया

लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने उत्तर प्रदेश विधान सभा में ई-विधान व्यवस्था एवं 18वीं विधान सभा के नवनिर्वाचित सदस्यों के प्रबोधन कार्यक्रम पर अपने विचार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि देश की आजादी के बाद लोकतंत्र की 75 वर्ष की यात्रा में देश में संसदीय लोकतंत्र सशक्त हुआ है। जनता का विश्वास संसदीय लोकतंत्र के प्रति और बढ़ा है। उत्तर प्रदेश की विधान सभा सम्भवतः विश्व की सबसे बड़ी विधान सभा है। यहां से निकले नेताओं ने देश का गौरव बढ़ाया है। देश के वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी सहित उत्तर प्रदेश से आने वाले अनेक प्रधानमंत्रियों ने देश को नेतृत्व दिया है। इसलिए राष्ट्रीय राजनीति में उत्तर प्रदेश की हमेशा विशेष भूमिका रही है। उत्तर प्रदेश विधान सभा की भी सभी विधान मण्डलों के मार्गदर्शन में विशेष भूमिका रही है।

लोक सभा अध्यक्ष ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं सदन के नेता के रूप में अपने दायित्वों का निर्वहन करने के लिए बधाई देते हुए आशा व्यक्त की कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राज्य का सर्वांगीण और समावेशी विकास होगा। देश के अन्दर उत्तर प्रदेश सामाजिक, आर्थिक परिवर्तन का एक नया युग शुरू करेगा। 

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश देश की राजनीतिक एवं सांस्कृतिक हृदय स्थली, एक ऐतिहासिक और गौरवशाली प्रदेश है। यह राज्य भारत की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक, भौतिक और राजनीतिक चेतना का केन्द्र रहा है। स्वतंत्रता संग्राम के आन्दोलन से लेकर अब तक इस पवित्र भूमि के हमारे राजनेताओं ने राज्य के विकास के लिए यशस्वी कार्य किये हैं।

लोक सभा अध्यक्ष ने कहा कि प्रदेश विधान सभा के सदस्यों को जनता ने बहुत भरोसे के साथ चुनकर भेजा है। वे यहां लाखों लोगों का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने जनप्रतिनिधियों द्वारा जनता के सरोकारों को सदन के माध्यम से सरकार तक पहुंचाने पर बल देते हुए कहा कि विधान मण्डल एक ऐसा केन्द्र है जहां पर राज्य की 25 करोड़ जनता की भावनाओं, चिन्ताओं, अभावों, कठिनाइयों, समस्याओं का एक साथ समावेश हो सकता है। इसलिए विधान मण्डल का चर्चा एवं संवाद के माध्यम से सार्थक उपयोग करने की आवश्यकता है, जिससे अन्तिम पायदान के व्यक्ति की चिन्ताओं, अभावों, कठिनाइयों, समस्याओं का समाधान किया जा सके और उनके जीवन स्तर में सामाजिक, आर्थिक परिवर्तन ला सके। लोक सभा अध्यक्ष ने कहा कि बाबा साहब डॉ0 आम्बेडकर ने कहा था कि हमें राजनीतिक लोकतंत्र के साथ-साथ सामाजिक लोकतंत्र भी लाना पड़ेगा। 

सामाजिक लोकतंत्र को मजबूत करने से राजनीतिक लोकतंत्र मजबूत होगा। निर्वाचित जनप्रतिनिधि विधान मण्डल में समाज के वंचित, गरीब, पीड़ित, शोषित वर्गों सहित सभी लोगों की आवाज बनते हैं। सरकार उनकी आवाज को ध्यान में रखकर अपनी सार्थक और सकारात्मक नीतियां और कार्ययोजनाएं तैयार करती है। उन्होंने आशा जतायी कि इस विधान सभा की गौरवशाली परम्परा, नियमों, प्रक्रियाओं के अनुरूप सभी सदस्य चर्चा के माध्यम से अन्तिम पायदान के व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन के लिए प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि सदन चर्चा और संवाद के केन्द्र होने चाहिए। जितनी अधिक चर्चा, संवाद, तर्क-वितर्क होगा, इस मंथन से उतना ही अमृत निकालकर हम जनता का कल्याण कर पाएंगे। इसलिए संसदीय प्रणाली चर्चा और संवाद का केन्द्र है।

लोक सभा अध्यक्ष ने कहा कि हम सब सदन में जनता के प्रतिनिधि हैं। सदन की गरिमा बनाना हम सबकी जिम्मेदारी है। हमारा जैसा आचरण रहेगा, उससे ही सदन की गरिमा बनती है। सदन की गरिमा बनाये रखने के लिए हम सभी को तर्क के आधार पर संवाद करना चाहिए। देश के अनेक नेता विधान मण्डल और संसद में तर्क के आधार पर अपनी बात रखकर सर्वश्रेष्ठ बने हैं। उन्होंने कहा कि विधान मण्डल और लोक सभा सर्वश्रेष्ठ नेता बनाने का माध्यम और मंच है।

लोक सभा अध्यक्ष ने कहा कि संसद और विधान मण्डल का मूल कार्य कानून बनाने का है। उत्तर प्रदेश विधान मण्डल का गौरवपूर्ण इतिहास रहा है, जिसने महत्वपूर्ण कानून बनाकर लोगों के जीवन में उल्लेखनीय सामाजिक, आर्थिक, परिवर्तन किया है। उन्होंने कहा कि कानून बनाते समय व्यापक चर्चा एवं संवाद होना चाहिए। कानून बनाने से पहले भी जनता से इनपुट लेना चाहिए, संवाद बनाना चाहिए। कानून बनाते समय जितनी अच्छी चर्चा होगी, उतना ही अच्छा कानून बनेगा। ऐसा कानून जनता के लिए कल्याणकारी होगा।

लोक सभा अध्यक्ष ने कहा कि सभी सरकारों का लक्ष्य कानून बनाकर जनता को अधिकार और न्याय दिलाने तथा दैनिक जीवन की कठिनाइयों को सरल बनाने का प्रयास रहता है। वर्तमान समय में कानून बनाते समय हो रही संवाद की कमी चिंता का विषय है। नवनिर्वाचित विधायकों को सदन में हुई पुरानी चर्चाओं का अनुभव प्राप्त करने के लिए उनका अध्ययन करना चाहिए। इससे सदन में कानून बनाते समय चर्चा करने में उन्हें सुविधा होगी। सदस्यों को अधिकतम समय विधान सभा में बैठने का प्रयास करना चाहिए। विधान सभा में बैठने से नवनिर्वाचित सदस्यों को अनुभवी विधायकों का मार्गदर्शन प्राप्त होगा। देश की सबसे बड़ी विधान सभा को चर्चा और संवाद का ऐसा केन्द्र बनना चाहिए, जो देश की अन्य विधान सभाओं का मार्गदर्शन कर सके।

लोक सभा अध्यक्ष ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में सूचना प्रौद्योगिकी के माध्यम से शासन को जवाबदेह बनाया गया है। जिस तरह शासन में सूचना प्रौद्योगिकी के व्यापक इस्तेमाल से पारदर्शिता आती है, उसी प्रकार विधान मण्डलों में सूचना प्रौद्योगिकी के बेहतर प्रयोग से सदन में तर्क एवं संवाद की स्थिति बेहतर होती है। उत्तर प्रदेश विधान सभा ने अत्यन्त कम समय में जिस तरह से पेपरलेस ई-विधान सभा की ओर कदम बढ़ाया है, वह सराहनीय है। इसी प्रकार यहां की लाइब्रेरी, संग्रहालय, रिसर्च विंग को भी आधुनिक और बेहतरीन बनाया जाना चाहिए। विधायकों की कैपेसिटी बिल्डिंग के लिए समय-समय पर देश के बड़े-बड़े विद्वानों के माध्यम से प्रबोधन कार्यक्रम होना चाहिए।