होम > भारत

रणजीत सिंह हत्याकांड मामले में अदालत ने गुरमीत राम रहीम को सुनाई उम्रकैद की सजा

रणजीत सिंह हत्याकांड मामले में अदालत ने गुरमीत राम रहीम को सुनाई उम्रकैद की सजा

चंडीगढ़| स्वयंभू संत और डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को उम्र भर जेल की सलाखों के पीछे रहना होगा। सोमवार को रणजीत सिंह हत्याकांड के 19 साल पुराने मामले में पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत ने गुरमीत राम रहीम और 4 अन्य आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई।


गुरमीत राम रहीम को 2017 में अपनी दो शिष्याओं के साथ दुष्कर्म के जुर्म में 20 साल जेल की सजा सुनाई गई थी और वह अभी हरियाणा के रोहतक की सुनारिया जेल में बंद है। इसके अलावा दो साल पहले डेरा प्रमुख को एक पत्रकार की हत्या के जुर्म में भी उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।


हरियाणा के पंचकुला में सीबीआई की विशेष अदालत के न्यायाधीश सुशील गर्ग ने 2002 में रणजीत सिंह की हत्या के लिए एक खचाखच भरी अदालत में फैसला सुनाया, जिसमें गुरमीत और चार अन्य को सजा सुनाई गई।


सीबीआई ने राम रहीम के लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत मौत की सजा की मांग की थी, जबकि डेरा प्रमुख ने रोहतक जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए पेश होकर दया की गुहार लगाई, जहां वह दुष्कर्म के दो मामलों और एक पत्रकार की हत्या के मामले में सजा काट रहा है।


अपराध के लिए दोषी ठहराए गए अन्य लोगों में कृष्ण लाल, जसबीर सिंह, अवतार सिंह और सबदिल शामिल हैं। हत्याकांड के एक और आरोपी की पिछले साल अक्टूबर में मौत हो गई थी।


कोर्ट ने गुरमीत पर 31 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है और इसकी आधी राशि पीड़ित परिवार को मुआवजे के तौर पर दी जाएगी।


पीड़ित के बेटे जगसीर ने कहा कि परिवार को आखिरकार न्याय मिला है, हालांकि इसकी काफी देरी हो गई। उन्होंने मीडिया से कहा, "मेरे दादा, जिन्होंने अपने बेटे के न्याय के लिए लड़ाई लड़ी थी, की 2016 में मृत्यु हो गई। मैं सिर्फ आठ साल का था, जब मेरे पिता की निर्मम तरीके से हत्या कर दी गई थी।"


उन्होंने कहा, "आज 19 साल बाद मेरा परिवार चैन की नींद सो सकता है।"


अभियोजन पक्ष के मुख्य गवाह, डेरा प्रमुख के पूर्व चालक खट्टा सिंह ने डेरा प्रबंधक की हत्या के पीछे की साजिश को उजागर करके मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


इससे पहले, अदालत की ओर से गुरमीत को 8 अक्टूबर को दोषी ठहराया गया था।


राज्य की राजधानी चंडीगढ़ से 250 किलोमीटर दूर रोहतक में उच्च सुरक्षा वाली सुनारिया जेल में बंद स्वयंभू संत पहले से ही उमकैद की सजा काट रहा है और अब अदालत ने हालिया फैसले ने उसकी मुसीबत और बढ़ा दी है।


52 वर्षीय राम रहीम वर्चुअल तरीके से सुनवाई में शामिल हुआ। उसने धर्मार्थ कार्यों की दलील देते हुए दया की गुहार लगाई।


राम रहीम के पूर्व अनुयायी रणजीत सिंह की 10 जुलाई 2002 को कुरुक्षेत्र जिले के उनके पैतृक गांव खानपुर कोलियान में चार हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी।


सीबीआई का तर्क था कि रणजीत सिंह की हत्या इसलिए की गई क्योंकि राम रहीम को संदेह था कि वह एक गुमनाम पत्र के प्रसार के पीछे था, जिसमें डेरा में महिला अनुयायियों के यौन शोषण का खुलासा हुआ था।


जांच एजेंसी ने डेरा प्रमुख की याचिका का विरोध करते हुए कहा कि पीड़िता ने उसे 'भगवान' के रूप में माना और आरोपी ने उसके खिलाफ गंभीर अपराध को अंजाम दिया। इसने कहा कि राम रहीम का आपराधिक इतिहास रहा है और उसने इस अपराध को ठंडे दिमाग से यानी सोच-समझकर किया।


पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने हाल ही में मामले को किसी अन्य न्यायाधीश को स्थानांतरित करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया था।


फैसला सुनाए जाने से पहले, स्थानीय अधिकारियों ने शहर में और डेरा सच्चा सौदा के मुख्यालय सिरसा में 2017 में दुष्कर्म के मामलों में उसकी सजा के बाद हुई हिंसा के मद्देनजर निषेधाज्ञा लागू कर दी थी।


25 अगस्त, 2017 को दुष्कर्म मामलों में राम रहीम को मिली सजा के कारण पंचकुला और सिरसा में हिंसा हुई थी, जिसमें 41 लोग मारे गए थे और 260 से अधिक घायल हो गए थे।