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स्वाधीनता संग्राम के गुमनाम सेनानियों के योगदान का भी स्मरण करें: राष्ट्रपति

स्वाधीनता संग्राम के गुमनाम सेनानियों के योगदान का भी स्मरण करें: राष्ट्रपति

आजादी की लड़ाई में हजारों सेनानियों ने अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया था। इनमें से कुछ बलिदानियों के नाम हम जानते हैं, लेकिन तमाम के नाम इतिहास के पन्नों में गुम हो गए हैं। राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी अजीजन बाई, जयदेव कपूर, शिव वर्मा, गया प्रसाद का उल्लेख करते हुए कहा कि आज के युवाओं को इन गुमनाम सेनानियों की भी जानकारी दी जानी चाहिए। आजादी के 75 वर्ष पर होने वाले अमृत महोत्सव में हम स्वाधीनता संग्राम के इन गुमनाम सेनानियों के योगदान का स्मरण करेंगे।

राष्ट्रपति के अनुसार स्वाधीनता संग्राम में उत्तर प्रदेश और कानपुर के लोगों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। कानपुर में 1857 के स्वाधीनता संग्राम का नेतृत्व करने वाले नानाजी पेशवा, तात्या टोपे और अजीमउल्ला खान की वीरता की गाथा तो आपने सुनी होगी, लेकिन अजीजन बाई के योगदान से लोग अच्छी तरह परिचित नहीं हैं। हमारी वर्तमान और भावी पीढिय़ों के सामने स्वाधीनता संग्राम की वीरांगनाओं के त्याग और बलिदान की प्रेरक गाथा रखी जानी चाहिए।

इसी प्रकार चंद्रशेखर आजाद और सरदार भगत ङ्क्षसह के साथ नगर के जुड़ाव को बहुत लोग जानते हैं लेकिन उनके अभिन्न सहयोगी रहे जयदेव कपूर और शिव वर्मा के बारे में कम लोग जानते हैं। वे यहीं डीएवी कालेज में पढ़ते थे। कानपुर में जन्मे स्वाधीनता सेनानी डा. गया प्रसाद के बारे में भी लोग बहुत कम जानते हैं। ऐसे न जाने कितने स्वाधीनता सेनानियों के महत्वपूर्ण योगदान से भारत को स्वतंत्रता प्राप्त हुई थी। हम सभी का कर्तव्य है कि ऐसे गुमनाम स्वाधीनता सेनानियों के योगदान के बारे में जानकारी लोगों के सामने लाई जाए।

राष्ट्रपति द्वारा उल्लेखित स्वतंत्रता संग्राम सेनानी

अजीजन बाई : मध्य प्रदेश में जन्मीं अजीजन बाई जब तात्या टोपे के संपर्क में आईं तो महिला सैनिकों की टोली बना ली जो पुरुषों के वेश में रहती थी। अजीमुल्ला खां का पता न बताने पर अंग्रेजों ने उन्हें गोलियों से छलनी कर दिया था।

जयदेव कपूर : जयदेव कपूर हरदोई के थे। शादाबाद में उनका जन्म हुआ था। उन्हें कालापानी की सजा दी गई थी, जहां वह 60 दिन भूखे रहे थे। वहां उन्हें 30 बेंत रोज मारने की सजा भी दी गई थी।

शिव वर्मा : हरदोई में जन्मे शिव वर्मा कानपुर आ गए थे। वह चंद्रशेखर आजाद व सरदार भगत ङ्क्षसह के काफी निकट थे। लाहौर षडय़ंत्र केस में उन्हें आजीवन काला पानी की सजा दे दी गई थी।

डा. गया प्रसाद : कानपुर में जन्मे डा. गया प्रसाद चंद्रशेखर आजाद व सरकार भगत ङ्क्षसह के करीबी थे। 15 मई 1929 को उन्हें सहारनपुर बम फैक्ट्री का संचालन करने में गिरफ्तार किया गया था।