होम > भारत

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पास कौन सी सवैधानिक शक्तियाँ होंगी ?

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पास कौन सी सवैधानिक शक्तियाँ होंगी ?

देश की पहली आदिवासी महिला द्रौपदी मुर्मू देश की नई राष्ट्रपति बन गई हैं। इस दौरान वह देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर पहुंचने वाली दूसरी महिला राष्ट्रपति हैं। आज से वो पूरे देश की बाग डोर संभालेगी।अब उनके पास विवेकाधीन शक्तियों के साथ वीटो शक्तियां भी होंगी। 

हम आपको बताने जा रहें हैं कि राष्ट्रपति रहते द्रौपदी मुर्मू के पास क्या क्या शक्तियां होंगी ? वो कितनी बार इस पद के लिए चुनी जा सकती हैं ?

कितनी बार राष्ट्रपति बनी रह सकती हैं मुर्मू ?

जैसा की आपको बताते चले कि राष्ट्रपति चुने जाने के बाद उसका कार्यकाल सिर्फ पाँच साल तक का होता हैं। जिसके उपरांत उसे दोबारा चुनकर आना होता है जिसमें पुनर्निर्वाचन की कोई सीमा नहीं होती है। अभी तक वैसे देखा जाए तो  केवल राजेंद्र प्रसाद एक से अधिक बार इस पद पर रह चुके हैं। वो 12 साल से अधिक अवधि तक राष्ट्रपति पद पर रहे।

 

राष्ट्रपति पद के दौरान मुर्मू के पास क्या क्या शक्तियां होंगी?

समस्त संघ की कार्यकारी शक्ति राष्ट्रपति में निहित है। जिसका प्रयोग वह सीधे मंत्रिपरिषद के जरिए करता है। राष्ट्रपति किसी भी क्षेत्र को अनुसूचित क्षेत्र में घोषित करने में सक्षम है।

देश का सर्वोच्च नागरिक होने के नाते वो देश के प्रधानमंत्री, केंद्रीय कैबिनेट, मुख्य न्यायाधीश व सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की नियुक्ति भी राष्ट्रपति ही करता है। इसके साथ ही राज्यों के राज्यपाल, मुख्य निर्वाचन आयुक्त, अटॉर्नी जनरल जैसी संवैधानिक नियुक्तियां भी राष्ट्रपति ही करते हैं।

वीटो पावर के मामले में राष्ट्रपति का क्या अधिक होता हैं ?

संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित किसी भी विधेयक के कानून बनने के लिए राष्ट्रपति की सहमति अत्यंत जरूरी है। बिना राष्ट्रपति की सहमति के कोई भी अधिनियम पारित नहीं हो सकता।  संविधान के अनुच्छेद 11 के में राष्ट्रपति की वीटो पावर का जिक्र किया गया है। इसके मुताबिक उसके पास तीन वीटो शक्तियांहोती हैं :-

1 - पूर्व वीटो,

2 -निलंबित वीटो,

3 -पॉकेट वीटो। 

क्या होगी राष्ट्रपति की  सैलरी ?

द्रौपदी मुर्मू देश की राष्ट्रपति बनते ही इनको हर महीने पांच लाख रुपये तनख्वाह के रूप में मिलेंगे । 2017 तक राष्ट्रपति की तनख्वाह 1.5 लाख रुपये महीने मिलती थी। 2018 में इसे बढ़ाकर पांच लाख कर दिया गया। तनख्वाह के साथ ही राष्ट्रपति को कई अतिरक्त अलाउंस मिलते हैं। इनमें जिंदगी भर के लिए मुफ्त चिकित्सा, आवास और उपचार सुविधा आदि शामिल है।  राष्ट्रपति के आवास, स्टाफ, भोजन और मेहमानों की मेजबानी आदि पर सरकार हर साल करीब 2.25 करोड़ रुपये खर्च करती है।  राष्ट्रपति तीनों सेनाओं का सुप्रीम कमांडर होता है। वह तीनों सेना प्रमुखों की नियुक्ति करता है। इसके साथ ही युद्ध और शांति काल का एलान भी राष्ट्रपति ही करते हैं। राष्ट्रपति राष्ट्रीय, राज्य और वित्तीय आपातकाल लगा सकता है। किसी राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा सकता है।