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टेलीमेडिसिन ई संजीवनी का रोज 90 हजार मरीज करते है उपयोग, अब तक 1.2 करोड़ को दिया इलाज

टेलीमेडिसिन ई संजीवनी का रोज 90 हजार मरीज करते है उपयोग, अब तक 1.2 करोड़ को दिया इलाज

नई दिल्ली| राष्ट्रीय टेलीमेडिसिन सेवा ई संजीवनी लोगों के लिए संजीवनी बूटी का काम कर रही है। ये रोज देश भर के 90 हजार मरीजों को इलाज मुहैया करा रही है। लगातार इलाज देते हुए इसने अब तक देश के 1.2 करोड़ लोगों को परामर्श दिया है।


गौरतलब है कि ये तेजी से देश की सबसे लोकप्रिय और सबसे बड़ी टेलीमेडिसिन सेवा के रूप में आकार ले रही है। ई-संजीवनी का उपयोग पूरे देश में रोगियों के साथ-साथ डॉक्टरों और विशेषज्ञों द्वारा व्यापक रूप से अपनाने के संकेत मिल रहे है।


टेलीमेडिसिन की उपयोगिता को ध्यान में रखते हुए और कोविड -19 की अपेक्षित तीसरी लहर की योजना बनाने में, केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की पहल को प्रतिदिन 5,00,000 परामर्श को सक्षम करने के लिए आगे बढ़ाया जा रहा है।


ई-संजीवनी सेवा का उपयोग करने के मामले में आंध्र प्रदेश अग्रणी 10 राज्यों में सबसे ऊपर है। यह 'ई-संजीवनी एबी एचडब्ल्यूसी' सेवाओं को शुरू करने वाला पहला राज्य था। अन्य राज्यों में कर्नाटक, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और केरल शामिल हैं।


'ई-संजीवनी ओपीडी' नागरिकों के लिए गैर-कोविड और कोविड से संबंधित आउट पेशेंट स्वास्थ्य सेवाओं की तलाश के लिए एक टेलीमेडिसिन संस्करण है। इसे 13 अप्रैल, 2020 को देश में लगाए गए पहले लॉकडाउन के दौरान शुरू किया गया था, जब सभी ओपीडी बंद थे।


अब तक ई-संजीवनी ओपीडी के माध्यम से 51,00,000 से अधिक रोगियों की सेवा की जा चुकी है, जो 430 से अधिक ऑनलाइन ओपीडी की मेजबानी करता है जिसमें सामान्य ओपीडी और विशेष ओपीडी शामिल हैं।


बठिंडा (पंजाब), बीबीनगर (तेलंगाना), कल्याणी (पश्चिम बंगाल), ऋषिकेश (उत्तराखंड), किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज, लखनऊ (उत्तर प्रदेश) में एम्स जैसे प्रीमियर तृतीयक स्तर के चिकित्सा संस्थान ई-संजीवनी ओपीडी के माध्यम से आउट पेशेंट स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करते हैं।


राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन के अनुरूप, यह डिजिटल पहल देश में डिजिटल स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देगी। यह एक स्वदेशी टेलीमेडिसिन तकनीक है जिसे सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस कंप्यूटिंग (सी-डैक) द्वारा मोहाली, पंजाब में विकसित किया गया है।


'ई-संजीवनी' दो मोड के माध्यम से परिचालित है - 'ई-संजीवनी एबी एचडब्ल्यूसी' (डॉक्टर-टू-डॉक्टर टेलीमेडिसिन प्लेटफॉर्म) और 'ई-संजीवनी ओपीडी' (रोगी-से-डॉक्टर टेलीमेडिसिन प्लेटफॉर्म) - जो नागरिकों को उनके घरों में बैठकर आउट पेशेंट सेवाएं प्रदान करता है।


ई-संजीवनी एबी एचडब्ल्यूसी ने लगभग 67,00,000 परामर्श पूरे कर लिए हैं और इसे 'आयुष्मान भारत' योजना के तहत स्वास्थ्य और कल्याण केंद्रों पर लागू किया जा रहा है।

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