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जानिए क्यों महत्वपूर्ण है कुशीनगर, जहां पीएम मोदी ने किया है एयरपोर्ट का उद्घाटन

जानिए क्यों महत्वपूर्ण है कुशीनगर, जहां पीएम मोदी ने किया है एयरपोर्ट का उद्घाटन

भगवान बुद्ध के परिनिर्वाण स्थल पर अब सिर्फ देश नहीं बल्कि दुनिया के बौद्ध अनुयायियों की नजरें है। आने वाले दिनों में कुशीनगर में धार्मिक टूरिस्ट पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए मौजूद होंगे। गौरतलब है कि कुशीनगर ऐतिहासिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है। हालांकि काफी कम लोगों को ज्ञात है कि आज का कुशीनगर किसी समय में कुशीनारा के मान से जाना जाता था।


जानते हैं कुशीनारा के बारे में


जानकारी के मुताबिक प्राचीन काल में सैथवारमल्ल वंश की राजधानी कुशीनगर हुआ करती है। ये 16 महाजनपदों में शामिल था। मल्ल राजाओं की यह राजधानी तब कुशीनारा के नाम से जानी जाती थी। ईसापूर्व पांचवी शताब्दी के अंत या छठी शताब्दी की शुरुआत में भगवान बुद्ध कुशीनगर आए थे।


यहां उन्होंने अपना अंतिम उपदेश दिया और यहीं पर महापरिनिर्वाण प्राप्त किया। जानकारों की मानें तो यहां चीनी यात्री ह्वेनसांग और फाहियान भी आए थे। उनके यात्रा वृतांतों में भी कुशीनगर के कई बार उल्लेख हुआ है। 


वहीं हिंदूओं का धार्मिक ग्रंथ वाल्मीकि रामायण देखें तो उसके मुताबिक ये स्थान त्रेता युग में भी मौजूद था। जानकारी के मुताबिक कुशीनगर को रामायण काल में भगवान पुरुषोत्तम राम के पुत्र कुश की राजधानी के तौर पर जाना जाता था। उस समय इसका नाम कुशावती था।


बौद्ध धर्म की पवित्र नदी को कराया जिंदा


बौद्ध धर्म के लोगों के लिए हिरण्यावती नदी बहुत पवित्र है। प्रशासन की लापरवाही का शिकार हुई ये नदी एक समय में मृत हो गई थी। मगर वर्ष 2012 में यहां के जिलाधिकारी रिग्जियान सैंफिल के प्रयासों के बाद इस नदी को पुनर्जीवित किया गया। सैंफिल की कड़ी मेहनत के बाद आज भी इस नदी में 12 महीने पानी बहता है।


1861 में हुई थी खुदाई


अंग्रेज जनरल ए. कनिंघम और एसीएल कार्लाइल ने इस स्थान पर वर्ष 1861 में खुदाई करवाई थी। इस खुदाई में छठी शताब्दी में निर्मित भगवान बुद्ध की लेटी हुई प्रतिमा मिली थी। इस खुदाई में टीम को रामाभार स्तूप और माथाकुंवर मंदिर भी मिला था। 


इस स्थल की ऐतिहासिक महत्ता बरकरार रखने के लिए भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण विभाग ने वर्ष 1904 से 1912 के दौरान यहां कई बार खुदाई करवाई। इस स्थल पर आज भी कई प्राचीन मंदिर और मठ मौजूद है।