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हरियाणा के किसानों पर पुलिस ने किया लाठीचार्ज, मुख्यमंत्री के खिलाफ चल रहा था प्रदर्शन

हरियाणा के किसानों पर पुलिस ने किया लाठीचार्ज, मुख्यमंत्री के खिलाफ चल रहा था प्रदर्शन

चंडीगढ़| हरियाणा में मुख्यमंत्री का विरोध कर रहे किसानों को हटाने के लिए पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया। दरअसल राज्य में स्थानीय निकाय चुनाव कराने को लेकर मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की अध्यक्षता में भाजपा की राज्यस्तरीय बैठक के विरोध में शनिवार को जुटे प्रदर्शनकारी किसानों और पुलिस के बीच हिंसा भड़क गई। 


पुलिस ने करनाल की ओर जाते किसानों को रोकने और उन्हें तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया, जिसमें कम से कम 10 प्रदर्शनकारी घायल हो गए। खट्टर के गृहनगर में हुई बैठक में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ओ.पी. धनखड़ भी मौजूद थे।


किसानों के खिलाफ बल प्रयोग के विरोध में भारतीय किसान संघ (हरियाणा इकाई) के प्रमुख गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने राज्य में सभी राजमार्गों को अवरुद्ध करने का आह्वान किया।


चढ़ूनी ने कहा, "हम किसानों पर पुलिस से बल प्रयोग करवाने के लिए राज्य की भाजपा सरकार की आलोचना करते हैं। मैं सभी किसानों से राज्य के सभी राजमार्गों को जाम करने का अनुरोध करता हूं।"


हिसार, जींद, भिवानी, रोहतक, दादरी, फतेहाबाद और अंबाला में यातायात बाधित होने की सूचना मिली है।


पंजाब में शंभू सीमा पर अमृतसर से नई दिल्ली जाने वाले राजमार्ग पर यातायात बाधित हो गया है। साथ ही अंबाला और यमुनानगर के रास्ते उत्तर प्रदेश जाने वाले राजमार्ग पर भी यातायात प्रभावित हुआ है।


किसान समूह अपने छात्र निकाय संयुक्त किसान मोर्चा के तहत कृषि कानूनों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। संगठन के नेता दर्शन पाल ने किसानों से शाम 5 बजे सड़कों की नाकाबंदी करने का आग्रह किया। उन्होंने प्रशासन से झड़प के दौरान गिरफ्तार किए गए लोगों को रिहा करने की मांग की।


कांग्रेस नेता और दो बार के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने किसानों पर लाठीचार्ज की निंदा की।


हुड्डा ने एक ट्वीट में कहा, "करनाल में किसानों पर कार्रवाई अलोकतांत्रिक और अमानवीय है। लोकतंत्र में विरोध करने का अधिकार सभी को है। सरकारें गोली के डर से नहीं, बल्कि दिल जीतने से चलती हैं।"


भाजपा सरकार और उसके नेता, मुख्य रूप से पंजाब और हरियाणा में, तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों की नाराजगी का सामना कर रहे हैं। किसान खासकर राष्ट्रीय राजधानी की सीमाओं पर, पिछले साल नवंबर के अंत से ही लगातार धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं।