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आइए आज जानते हैं अनन्तमूल और इसके औषधीय उपयोग के बारे में

आइए आज जानते हैं अनन्तमूल और इसके औषधीय उपयोग के बारे में

अनन्तमूल भूमि पर छिछड़ने वाली एक लता है जो उत्तर भारत तथा पंजाब में पाई जाती है। इसकी शाखाएं गोल चिकनी तथा पतली धारियों से युक्त होती हैं। इसकी पत्तियां अभिमुखी क्रम में स्थित तथा पत्तियों पर सफ़ेद वर्ण  की धरी से शुशोभित होती है. इसकी शाखा सफ़ेद तथा सुगन्धित होती है ।
 
औषधीय उपयोग -

१. इसकी जड़ को पानी में घिस कर आँखों में अंजन करने से तथा इसके पत्तों की राख को शहद में मिला कर अंजन करने से आंख की फूली काट जाती है ।
२. इसके पत्ते तोड़ने के बाद जो दूध निकलता है उसे शहद में मिला कर आंख में लगाने से नेत्र रोगों में लाभ मिलता है ।
३. इसकी पत्तों को पीस कर दातों के नीचे दबाने से दाँतों के दर्द से छुटकारा मिलता है ।
४. इसके २- २ ग्राम चूर्ण को दिन में दो से तीन बार सेवन करने से गांजा पन दूर होता है ।
५. इसके मूल को ३ ग्राम मात्रा में ले कर पानी में घोट कर पीने से उदरशूल नष्ट होता है ।
६. अनंतमूल के जड़ की २ ग्राम छाल को १० काली मिर्च और २५ ग्राम पानी में पीस कर सात दिन सेवन करने से आँखों तथा शरीर का पीला पान दूर होता है ।
७. इसके ३ ग्राम चूर्ण को दूध के साथ सुबह शाम सेवन करने से पाचन क्रिया बढ़ती है और रक्त पित्त का नाश होता है ।