होम > अन्य

आइये जानते है गिलहरी के शरीर में निशान का रहष्य

आइये जानते है गिलहरी के शरीर में निशान का रहष्य

आइये जानते है गिलहरी  के शरीर में  निशान का रहष्य  से जुडी बात धार्मिक मान्यताओं में गिलहरी को भगवान राम का साथी माना जाता है। गिलहरी जहां भी फुदकना शुरू करती है तो समझिए जल्द ही कुछ अच्छा होने वाला है। अगर आपके आंगन में भी गिलहरी फुदकती है तो आपके जल्द ही खुशियां मिलेंगी।

जब रामजी को 14 वर्ष का वनवास मिला था। तभी वनवास के दौरान भगवान राम ने लंका पर आक्रमण करने के लिए छोटे से लेकर बड़े जानवरो के सहयोग से समुद्र में पुल बनाने का काम शुरू करने लगे और पुल बनाने के लिए बड़े से लेकर छोटे छोटे पत्थरो की सहायता से पुल का निर्माण कार्य शुरू किया,उसी समय की बात है, वहां पर एक पेड़ था

उस पेड़ पर एक गिलहरी रहती थी,पुल बनाने का काम देखकर गिलहरी भी उस पेड़ से नीचे उतर कर उनकी मदद करने के लिए आ गयी, वह गिलहरी समुद्र के पानी में बार बार डुबकी लगाती और अपने रोयेंदार शरीर में बालू और पत्थरों के कणों को चिपका कर ले आती और फिर पुल पर जाकर अपने शरीर को जोर-जोर से हिलाती ताकि जो बालू उसके शरीर में चिपकी है। वह पुल पर गिर जाए और पुल मजबूत हो जाए। यह मोहक दिर्ष्य  भगवान राम ने यह सब देखा तभी  गिलहरी का यह काम देखकर भगवान श्रीराम की प्रसन्नता का ठिकाना नहीं रहा,उन्होंने गिलहरी के प्यार समर्पण को देखकर प्यार से उसे अपनी गोद में उठाया और प्यार से सहलाते हुए बोले तुम नन्ही सी जान हो किंतु तुम्हारे सहयोग की भावना और मेरे प्रति तुम्हारा यह समर्पित प्रेम अतुलनीय है। इसलिए संसार में तुम जहां कहीं भी रहोगी

लोग तुम्हें देखकर मुझे अर्थात भगवान राम को याद करेंगे,माना जाता है कि इसीलिए गिलहरियों के शरीर पर श्रीराम की अंगुलियों के निशान आज भी होते हैं।लोगों का ऐसा मानना है कि जब भगवान श्रीराम ने ये बात कहकर उस गिलहरी को सहलाया तो उनकी उंगलियों के निशान धारी के रुप में उसकी पीठ पर बन गए और आज तक बने हुए हैं। इसलिए आज जब भी गिलहरी को देखते तो  भगवान श्री राम को याद करते और ये निशान अत्यंत ही मोहक है और गिलहरी को देखकर बच्चे बहुत खुश होते है।