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कब और किस मुहूर्त में बहनें बांधे राखी

कब और किस मुहूर्त में बहनें बांधे राखी

रक्षा बंधन भाई-बहन का प्रतीक माना जाता है। रक्षा बंधन भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को जताता है और घर में खुशिया लेकर आता है। इसके अलावा यह त्योहार भाईयों को याद दिलाता है कि उन्हें अपनी बहनों की रक्षा करनी चाहिए। रक्षा बंधन का त्योहार भाई को अपनी बहन के प्रति उसका कर्तव्य याद दिलाता है।

रक्षा सूत्र कोई भी किसी को भी बांध सकता है, उसकी रक्षा के लिए और जो बांध रहा है उसकी रक्षा के लिए भी। लेकिन वर्तमान में प्रचलन से यह परंपरा अब भाई और बहन के बीच ही सिमट कर रह गई है तो यह अच्छा भी है। भाई को अपनी बहन की रक्षा का वचन देना चाहिए और बहन भी भाई की लंबी आयु की कामना करें।

शरीर के दाहिने हिस्से में नियंत्रण शक्ति भी ज्यादा होती है। दाहिने हाथ को वर्तमान जीवन के कर्मों का हाथ भी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दाहिने हाथ से किए गए दान, धर्म को भगवान स्वीकार करते हैं इसलिए दायीं कलाई में राखी बांधने की परंपरा है।यह रक्षा सूत्र पुजारी द्वारा राजा को, ब्राह्मण द्वारा सेना को, एक बहन द्वारा भाई को और मां द्वारा अपने बेटे को बंधे जा सकते हैं। भाई की दायीं कलाई में राखी का पवित्र धागा, मंत्र बोलते हुए बांधे।

रक्षासूत्र का मंत्र है- 'येन बद्धो बलि राजा, दानवेन्द्रो महाबल: तेन त्वाम् प्रतिबद्धनामि रक्षे माचल माचल:। 
इस मंत्र का अर्थ -दानवीर महाबली राजा बलि जिससे बांधे गए थे, उसी से तुम्हें बांधता हूं। हे रक्षे! (रक्षासूत्र) तुम चलायमान न हो, चलायमान न हो। मान्यता है कि इस मंत्र के साथ राखी बांधने से वो प्रभावी हो जाता है।

11 अगस्त 2022 को सुबह 10 बजकर 38 मिनट पर शुरू हो रही है और 12 अगस्त 2022 को सुबह 7 बजकर 5 मिनट पर समाप्त होगी, ऐसे में रक्षा बंधन का त्योहार 11 अगस्त को मनाया जाएगा, बहनें 11 अगस्त 2022 को सुबह 8 बजकर 51 मिनट से लेकर रात 9 बजकर 19 मिनट के बीच राखी बांध सकती है।

इससे राखी के धागों में शक्ति का संचार होता है। भाई बहन एक दूसरे को मिठाई खिलाकर मुंह मीठा कराएं। अगर भाई बड़ा हो तो बहनें भाई के चरण स्पर्श करें, बहनें बड़ी हों तो भाईयों को बहनों के चरण छूकर आशीर्वाद लेना चाहिए।

शास्त्रानुसार इसके लिए पांच वस्तुओं का विशेष महत्व होता है, जिनसे रक्षासूत्र का निर्माण किया जाता है। इनमें दूर्वा (घास), अक्षत (चावल), केसर, चंदन और सरसों के दाने शामिल हैं। इन 5 वस्तुओं को रेशम के कपड़े में बांध दें या सिलाई कर दें, फिर उसे कलावे में पिरो दें। इस प्रकार वैदिक राखी तैयार हो जाएगी।