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पत्ते अपने रंग क्यों बदलते है

पत्ते अपने रंग क्यों बदलते है

पत्तियों की कोशिका में हरित-लवक chloroplast में मौजूद वर्णक क्लोरोफिल सूर्य के प्रकाश में से लाल और नीले प्रकाश को अवशोषित कर लेता है जिससे कि पत्ती की सतह से परावर्तित होने वाला प्रकाश हरे रंग का दिखाई पड़ता है।

पतझड़ी या पर्णपाती (deciduous) ऐसे पौधों और वृक्षों को कहा जाता है जो हर वर्ष किसी मौसम में अपने पत्ते गिरा देते हैं। उत्तर भारत में तथा समशीतोष्ण (टेम्परेट) क्षेत्रों में यह शरद ऋतु में होता है, जिस कारण उस मौसम को 'पतझड़' भी कहा जाता है। अन्य क्षेत्रों में कुछ वृक्ष अपने पत्ते गर्मी के मौसम में खो देते हैं।

वर्षा के बाद शीत तथा पतझड़ का मौसम आता है,इस मौसम में शीतलहर के कारण प्रकाश का आभाव हो जाता है इससे प्रकाश संस्लेशन कृया होने मे कठिनाई होती है तथा पेड़ पौधे पत्तों में बचे क्लोरोफील से अपना जीवन बचाते है । अतः पत्ते पीला होकर गीर जाते हैं।