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शनि देव को उनकी पत्नी ने क्यों दिया था श्राप

शनि देव को उनकी पत्नी ने क्यों दिया था श्राप

सूर्य पुत्र शनिदेव को देवताओं का दण्डाधिकारी माना जाता है। मान्यता है कि भगवान शिव ने शनि देव की तपस्या से प्रमन्न होकर शनि देव को यह पद प्रदान किया था । इसी कारण ही शनि देव प्रत्येक व्यक्ति को उसके किए गए अच्छे और बुरे कर्मों के हिसाब से फल प्रदान करते हैं। व्यक्ति के भूलवश किए हुए गलत कार्य भी शनि देव के दण्ड विधान से बच नहीं पाते। शनिदेव के इसी गुण के कारण मनुष्य क्या देवता भी उनसे डरते हैं। पर क्या आपको मालूम है कि शनिदेव को भी अपनी गलती के लिए श्राप का भागी होना पड़ा था। 


एक दिन उनकी पत्नी को पुत्र प्राप्ति की चाह हुई I वह शनि देव की प्रतीक्षा करने लगीं, उधर शनि देव बाहरी दुनिया से दूर ध्यान में मग्न थे I शनि देव को ध्यान से बाहर निकलने में काफी समय लग गया I दूसरी ओर पत्नी प्रतीक्षा करते हुए अत्यंत क्रोधित हो गईं।


शनि देव जैसे ही उनके पास पहुंचे, क्रोध के आवेश में पत्नी ने श्राप दे दिया,कि आप आज से जिसे भी देखेंगे, वह नष्ट हो जाएगा I उनकी श्राप फलित होना था क्योंकि वह पतिव्रता तेजस्वी स्त्री थींI शनि देव ने देरी का कारण बताया और उनको काफी समझाया, उन्हें अपनी गलती का एहसास तो हो गया, लेकिन वह श्राप को निष्प्रभावी नहीं कर सकती थीं ,इस वजह से शनि देव की दृष्टि क्रूर हो गई।


ऐसी पौराणिक मान्यता है,हालांकि ज्योतिष में भी बताया गया है कि हर व्यक्ति के जीवन में शनि की दशा जरूर आती है,वह शनि की दृष्टि से बच नहीं सकता है।