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अपराजिता फूल का महत्व

अपराजिता फूल का महत्व

अपराजिता फूल नीले रंग का होता है, कहा जाता है कि शनिदेव के अलावा ये पुष्प भगवान विष्णु को भी बेहद पसंद है, इतना ही नहीं, अपराजिता के फूल के जरिए ऐसे तमाम ज्योतिषीय उपाय किए जाते हैं, जिससे नारायण, माता लक्ष्मी और शनिदेव की कृपा परिवार पर बनी रहती है और धन से जुड़ा कोई भी संकट समाप्त हो जाता है, परिवार में संपन्नता आती है।

अपराजिता पौधे को आमतौर पर बटरफ्लाई मटर के नाम से जाना जाता है। अपराजिता नाम का ही अर्थ है कि यह एक ऐसा पौधा जो कई बीमारियों को ठीक कर सकता है और इसे किसी भी बीमारी से नहीं हराया जा सकता है । इसे एक पवित्र पौधा माना जाता है।

अपराजिता नीले रंग के फूल के फायदों की बात करें, तो इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी तत्व होते हैं, जो एंटीऑक्सिडेंट की उच्च मात्रा के लिए जिम्मेदार होते हैं, यह इंफ्लेमेशन को कम करके कई तरह के क्रोनिक डिजीज से बचाने में भी मदद कर सकता है, इसके अर्क से बनी चाय पीने से सूजन और दर्द दूर होता है।वास्तु शास्त्र के अनुसार इस पौधे को घर में लगाने से धन संबंधित समस्याओं से छुटकारा मिलता है,ये नीली अपराजिता धन को आकर्षित करती है,वास्तु के अनुसार इस पौधे को लगाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, इससे व्यक्ति को जीवन में सफलता प्राप्त होती है।वास्तु शास्त्र के अनुसार, अपराजिता का पौधा पूर्व, उत्तर या फिर उत्तर-पूर्व दिशा में लगाना शुभ होता है। उत्तर और पूर्व के साथ ईशान कोण में भगवान गणेश, मां लक्ष्मी के साथ कुबेर भगवान का वास होता है।

अपराजिता के बीज सिर दर्द को दूर करने मे मदद करती हैं। दोनों ही प्रकार की अपराजिता नीले और सफ़ेद रंग की बुद्धि बढ़ाने, वात, पित्त, कफ को दूर करने में मदद करती है। अपराजिता के इस्तेमाल से साधारण से लेकर गंभीर बीमारियों का उपचार किया जा सकता है। यह शरीर के विभिन्न अंगों में होने वाले सूजन के लिए भी लाभप्रद होती है।

गुरुवार भगवान विष्णु का दिन है और शुक्रवार माता लक्ष्मी को समर्पित है इसलिए इन दोनों दिनों में यदि अपराजिता का पौधा लगाया जाता है तो आपके घर में माता लक्ष्मी का आगमन होता है और विष्णु जी की कृपा भी बनी रहती है। इन पौधों को दोनों में से किसी भी दिन शुभ चौघड़िया में लगाना चाहिए।

अपराजिता के पुष्प से भगवान शिव, विष्णु एवं शनि देव प्रसन्न होते हैं।