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चाय का महत्व -Medhaj News

चाय का महत्व -Medhaj News

आइये जानते है चाय की शुरुआत कब और कैसे हुई ,भारत में चाय पहली बार सन् 1834 में अंग्रेज लेकर आए थे। हालांकि,असम  के जंगल में यह पहले से ही पैदा होती थी। सन् 1815 में अंग्रेज यात्रियों का ध्यान असम में उगने वाली चाय की झाड़ियों पर गया। ऐसा देखा गया असम के स्थानीय कबाइली लोग इसका पेय बनाकर पहले से ही पीते थे।

चाय रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और शरीर के विशैले तत्व निकालने में बहुत सहायक होती है। ग्रीन टी के टीबैग को गर्म पानी में डालकर बिना शकर मिलाकर  पिएं। इसमें कैलोरी नहीं होती और मेटाबालिज्म भी अच्छा रहता है। यदि इसमें पोदिने की पत्ती भी डाल दी जाए तो पाचनतंत्र और भी बेहतर हो जाता है।

चाय हमारे शरीर के लिए बेहद ही फायदेमंद है चाय के सेवन से अस्थमा के रोगियों को राहत मिलती है,काली चाय का सेवन मधुमेह का जोखिम कम करता है,चूंकि चाय में कैफीन होता है, इसलिए इसका ज्यादा सेवन अनिद्रा की समस्या पैदा कर सकता है, ज्यादा चाय का सेवन कब्ज पैदा करता है और पाइल्स की समस्या हो सकती है,चाय के विटामिन - ए, बी -1, बी -2, बी -3 व विटामिन - सी भी पाऐ जाते हैं।

चाय या कॉफी पीने का सबसे अच्छा समय खाना खाने के 1-2 घंटे बाद का होता है। आप इसे सुबह भी पी सकते हैं, लेकिन ध्यान रखें, कि खाली पेट कभी भी चाय या कॉफी न  पीएं। खाली पेट चाय पीना निजर्लीकरण का कारण बन सकती है।

चाय का ज्यादा सेवन करने से घबराहट बढ़ सकती है,ज्यादातर लोग दूध वाली चाय का सेवन करते हैं और इस चाय में टैनिन होता है जो आपकी इस दिक्कत को बढ़ा सकता है, इसके साथ ही चाय में कैफीन भी पाया जाता है जिसके शरीर में जाने से भी कई तरह के नुकसान सेहत को हो सकते हैं,चाय का ज्यादा सेवन करना आंतों के लिए भी नुकसानदायक होता है।