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आइये जानते है पेंसिल का महत्व

आइये जानते है पेंसिल का महत्व

आइये जानते है पेंसिल कैसे बनता है और इसका महत्व  ग्रेफाइट और चिकनी मिट्टी  के मिश्रण से पेंसिल बनती है। 9H या 10H की पेंसिल मे चिकनी मिट्टी कि मात्रा ग्रेफाइट से कई ज्यादा होती है। जैसे जैसे ग्रेड H के तरफ़ आती है, मिट्टी की मात्रा घटती जाती है और ग्रेफाइट की मात्रा बढती जाती है।

कुछ देशो में पेंसिल लाल देवदार की लकड़ियों से बनाया जाता था ,पेंसिल के लिए इस्तेमाल की जाने वाली सबसे आम लकड़ी देवदार है एक पेड़ से 300,000 पेंसिल तक बनाई जा सकती है। केंद्र बनाने के लिए मिट्टी और ग्रेफाइट को एक साथ मिलाया जाता है ।लेकिन आज दुनिया भर में लगभग सभी पेंसिल अगरबत्ती देवदार से बनाई जाती हैं, जो कैलिफोर्निया के सिएरा नेवादा पहाड़ों में उगने वाली प्रजाति है। 

पेंसिल बनाने की विधि पेंसिल बनाने के लिए पेड़ों को खांचेदार स्लैब में काटा जाता है। रंग की रेखाएँ खांचे में डाली जाती हैं। स्लैब को एक साथ सैंडविच किया जाता है और फिर पेंसिल में मिलाया जाता है। 

पेंसिल लीड बनाने से लेकर बैटरी बनाने तक प्राकृतिक ग्रेफाइट का इस्तेमाल कई तरह से किया जाता है। ग्रेफाइट में मौजूद कार्बन परमाणुओं के छल्ले के कारण बनी परतदार संरचना इसे फिसलनदार बना देती है और इसी कारण से इसका उपयोग पेंसिल लीड में किया जाता है।

पेंसिल लिखने या चित्र बनाने के काम आती है। इसमें एक आसानी से सरकने वाली पतली छड़ होती है जो प्रायः ग्रेफाइट की बनी होती है जो कागज पर घिसकर अपने रंग के अनुरूप एक निशान छोड़ जाती है।