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हावड़ा ब्रिज का रहस्य

हावड़ा ब्रिज का रहस्य

साल 1936 में हावड़ा ब्रिज का निर्माण कार्य शुरू किया गया था और 1942 में यह पूरा हो गया था। उस समय यह पुल दुनिया में तीसरा सबसे लंबा ब्रिज था। 

1942 में इस पुल के निर्माण के बाद पुरे एक साल इस पुल को चेकिन के लिए रखा गया था।लेकिन पुरे एक साल तक इस पुल की जाँच पड़ताल बाद फ़ाईनली 1943 में आम जनता के उपयोग के लिए खोला गया और भारत का ये शानदार पुल जब बनकर तैयार हुआ तब इसका नाम था न्यू हावड़ा ब्रिज रखा गया था।  

यह ब्रिज हुगली नदी पर बना हैं। इस ब्रिज का नाम रवीन्द्र सेतु हैं पर हावड़ा ब्रिज के नाम से ही प्रसिद्ध हैं। हर रोज लाखो वाहन गुजारने की क्षमता रखने वाला यह पुल आज कोलकाता की पहचान बन चुका है। इसका निर्माण ब्रिटिश राज के दौरान 1939 में शुरू हुआ और यह 1943 में जनता के लिए खोला गया था।

खंभों वाला पुल बनाने से कहीं जहाजों की आवाजाही में रुकावट न आये। पुल में नट और बोल्ट नहीं हैं, लेकिन पूरी संरचना को रिवेट करके बनाया गया था। इसने 26,500 टन स्टील की खपत की, जिसमें से 23,000 टन उच्च तन्यता मिश्र धातु इस्पात, जिसे टिस्क्रोम के रूप में जाना जाता है, की आपूर्ति टाटा स्टील द्वारा की गई थी।