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मां कात्यायनी की कथा

मां कात्यायनी की कथा

एक पौराणिक कथा के अनुसार श्रीकृष्ण को पति के रूप में पाने के लिए ब्रज की गोपियों ने मां कात्यायनी की आराधना की थी, इसलिए इन्हें ब्रजभूमि की अधिष्ठात्री देवी कहलाईं गईं,वहीं धर्म ग्रंथों के अनुसार देवी ऋषि कात्यायन के कठोर तप से प्रसन्न होकर देवी कात्यायनी ने इनकी पुत्री के रूप में जन्म लिया।

नवरात्रि के छठे दिन माता कात्यायनी की पूजा की जाती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक महर्षि कात्यायन थे उनकी कोई पुत्री नहीं थी। एक दिन उन्होंने भगवती जगदम्बा को अपनी पुत्री के रूप में प्राप्त करने की कामना के साथ घोर तपस्या की। उनकी घोर तपस्या से माता जगदम्बा प्रसन्न हुई और उन्होंने महर्षि कात्यायन के यहां माता कात्यायनी के रूप में जन्म लिया तथा मां कात्यायनी के नाम से विख्यात हुई। 

मां कात्यायनी की पूजा करने से भक्तों को पापों से मुक्ति मिलती है। देवी कात्यायनी अपने भक्तों के जीवन से सभी कष्टों और कष्टों को दूर करती हैं। उनकी पूजा करने से भक्त को आत्मज्ञान की प्रबल अनुभूति होती है।

मां कात्यायनी पूजा का मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु मां मां कात्यायनी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।