कोरोना संक्रमितों के दिल के टेस्ट से मिल सकते हैं मौत के जोखिम के संकेत, शोध में आया सामने

कोरोना संक्रमितों के दिल के टेस्ट से मिल सकते हैं मौत के जोखिम के संकेत, शोध में आया सामने

लंदन| कोरोना वायरस संक्रमण से पीड़ित हर व्यक्ति मौत के करीब हो ये जरूरी नहीं है। वहीं अगर ये जानना है कि कोरोना संक्रमित व्यक्ति को मौत का कितना अधिक खतरा है तो इसके लिए दिल से जुड़ी बीमारियों का टेस्ट किया जा सकता है।


हालांकि सार्स-सीओवी-2, कोविड-19 का कारण बनने वाला वायरस, मुख्य रूप से श्वास नली को प्रभावित करता है। यह तीव्र कोरोनरी सिंड्रोम, मायोकार्डिटिस और फुफ्फुसीय अन्त: शल्यता सहित हृदय संबंधी जटिलताओं को भी जन्म देता है।


इटली में सालेर्नो विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं की एक टीम ने 1,401 रोगियों की जांच की। इन रोगियों को कोरोना संक्रमण की पुष्टि के बाद इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। लगभग 226 (16.1%) ने प्रवेश के 48 घंटों के भीतर ट्रान्स थोरासिक इकोकार्डियोग्राफी करवाई। इनमें 68 रोगियों (30.1%) में अस्पताल में मौत हुई।


सालेर्नो विश्वविद्यालय के प्रमुख लेखक एंजेलो सिल्वरियो ने कहा, "रोग की गंभीरता के क्लीनिकल और इकोकार्डियोग्राफीक पैरामीटर यह निर्धारित करने में मदद कर सकते हैं कि कोविड रोगियों में अस्पताल में मृत्यु दर के लिए उच्च जोखिम है।"


यह शोध यूरोपियन जर्नल ऑफ क्लिनिकल इन्वेस्टिगेशन में प्रकाशित हो चुका है। अध्ययन से पता चलता है कि प्रारंभिक एलवीईएफ घातक परिणाम की उच्च संभावना वाले रोगियों की पहचान करने के लिए बहुत उपयोगी हो सकता है क्योंकि हृदय संबंधी जटिलताएं कोविड के रोगियों के परिणामों पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती हैं।


शोध से पता चलता है कि उच्च रक्तचाप, मधुमेह और हृदय रोग वाले कुछ लोग एक बार कोरोना वायरस से संक्रमित होने के बाद अधिक गंभीर लक्षण और जटिलताएं विकसित कर सकते हैं।


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