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पर्यावरण संरक्षण पर जागरूकता के लिए ई.एस.डी.ए. ने किया 3 दिवसीय सम्मेलन

पर्यावरण संरक्षण पर जागरूकता के लिए ई.एस.डी.ए. ने किया 3 दिवसीय सम्मेलन

सार   
  • विश्व पर्यावरण सम्मेलन में देश के 22 राज्यों, 682 शोधकर्ताओं, पर्यावरणविद एवं छात्रों ने हिस्सा लिया 
  • सम्मेलन में विभिन्न विषयों पर 271 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए
  • पर्यावरण संरक्षण और उत्कृष्ट सामाजिक कार्यों में योगदान के लिए विशेष अतिथियों को सम्मानित किया गया


नई दिल्ली/ग़ज़िआबाद| आज पर्यावरण संरक्षण पूरी दुनिया के सामने एक सबसे बड़ी चुनौती है। इस समस्या से निपटने के लिए पूरी मानव जाती को पर्यावरण की एहमियत को समझने और प्रदुषण को काम करने की ज़रूरत है।  

देश में कोने कोने तक पर्यावरण संरक्षण पर जागरूकता लाने और बुद्धिजीवियों से इस विषय पर चर्चा और संवाद करने के उद्देश्य से एनवायरनमेंट एंड सोशल डेवलपमेंट एसोसिएशन (Environment and Social Development Association, ई.एस.डी.ए.) ने सी.एस.आई.आर.(CSIR), नीरी (NIRI), डॉ. भीम राव अम्बेडकर कॉलेज, दिल्ली विश्वविध्यालय (Delhi University), इग्नू (IGNOU), जी.आर.सी.इंडिया, अमेटी विश्वविद्यालय, जी. डी. गोयनका विश्वविद्यालय, नाबार्ड, शारदा विश्वविद्यालय, नीसा, एस. टी. ई. जैसे प्रसिद्ध शैक्षणिक संस्थानो के सहयोग से तीन दिवसीय विश्व पर्यावरण सम्मेलन 2021 का आयोजन किया। 

इस सम्मेलन में देश के 22 राज्यों, 9 देशों के अग्रणी वैज्ञानिक, लगभग 700 शोधकर्ताओं, पर्यावरणविद और छात्रों ने हिस्सा लिया। इन 3 दिनों में इन सभी ने मिलकर पर्यावरण संरक्षण और भविष्य की चुनौतियों पर चर्चा और विश्लेषण किया। इस कार्यक्रम को पहले दो दिनों के लिए वर्चुअली यानी की इंटरनेट के माध्यम से ई.एस.डी.ए. के प्रांगण से किया गया, जबकि समापन कार्यक्रम दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में किया गया। 
  
इस विश्व पर्यावरण सम्मेलन में विभिन्न पहलुओं जैसे वायु प्रदूषण नियंत्रण, जल सरक्षण, कूड़ा प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन, वैश्विक गर्मी, प्रकति संसाधन संरक्षण, ग्रीन एकॉनमी, वन्य जीव संरक्षण, वन संरक्षण, नदी एव तालाबों का पुनरुद्धार, वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत आदि विषयों पर 271 शोधपत्र प्रस्तुत किए गए। 

इसके अलावा देश और दुनिया के लगभग 50 से अधिक पर्यावरण वैज्ञानिकों और शिक्षकों ने अपने विचार प्रस्तुत किये। देश के जाने माने और पद्मश्री एव पद्म विभूषण डॉ अनिल प्रकाश जोशी के अलावा अमेटी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर पी. बी. शर्मा, पटेल चेस्ट इंस्टीट्यूट के निदेशक प्रोफेसर राज कुमार, अम्बेडकर कालिज के प्राचार्य डॉ जी. के. अरोड़ा, आई. आई. टी दिल्ली के प्रोफेसर ऐ. के. केसरी, सी.पी.सी.बी. के एडिशनल डायरेक्टर वी.पी. यादव, गाजियाबाद की सामाजिक वन निदेशक दीक्षा भंडारी, ई.एस.डी.ए के चेयरमैन डॉ जितेंद्र नागर, इग्नू की प्रोफेसर शाची शाह,  फिनलैंड की डॉ  पेरूमल, यूक्रेन के प्रोफेसर वोल्फ, ऑस्ट्रेलिया के डॉ अड्विन निकल्सन, नेपाल से प्रोफेसर जीनैल थापा, कुवैत से डॉ पाठक, अमेरिका से प्रोफेसर अशोक कुमार ने भी प्रतिभागियों को अपने विचारों से अवगत कराया।

डॉ अनिल प्रकाश जोशी ने कहा कि, "आज दुनिया भोग विलासिता के लिए प्राकृतिक संसाधनों का अति दोहन कर रही है और चारो तरफ सिर्फ मुनाफे की होड़ लगी हुई है जिससे पर्यावरण एव प्रकृति का विनाश होता जा रहा है, और मानव के सामने जलवायु परिवर्तन, वैश्विक तपन, वायु प्रदूषण एव जल स्रोत समाप्त होने जैसी वैश्विक चुनौतियां है"। डॉ जोशी ने कहा कि, 'अब समय आ गया जब हमे अपने प्राचीन समय के अनुसार प्रकृति के साथ जीवन जीने के रास्ते खोजने होंगे क्योकि मनुष्य को जीने के लिए बहुत कम भोजन एव पानी की आवश्यकता होती है"।  

इस दौरान विश्व पर्यावरण सम्मेलन के संयोजक और ई.एस.डी.ए. के चेयरमैन डॉ. जितेंद्र नागर ने कहा कि, 'ऐसे सम्मेलनों को आयोजित करने का उद्देश्य सिर्फ यह कि समाज में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता आए और देश - दुनिया के पर्यावरण वैज्ञानिक, कार्यकर्ता एवं छात्र मिलकर ऐसी योजनाओं बनाये कि आने वाले समय मे हम अपने विकास के साथ साथ अपने प्राकृतिक संसाधनों को भी संरक्षित रख सके'। 


कार्यक्रम के अंत में पर्यावरण संरक्षण और उत्कृष्ट सामाजिक कार्यों में अपने योगदान के लिए विशेष अतिथियों को सम्मानित किया गया। 

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