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भारत 2030 तक 500गीगावॉट स्वच्छ बिजली के लिए प्रतिबद्ध है

भारत 2030 तक 500गीगावॉट स्वच्छ बिजली के लिए प्रतिबद्ध है

भारत की ऊर्जा-मिश्रण रणनीतियों में स्वच्छ ऊर्जा विकल्पों की ओर एक बड़ा बदलाव, विनिर्माण क्षमता में वृद्धि, ऊर्जा उपयोग दक्षता, और उत्पादन से जुड़े प्रोत्साहनों सहित हाइड्रोजन के लिए एक नीति कार्यान्वयन शामिल है।
नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत 2030 तक गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से 500 गीगावॉट स्थापित बिजली क्षमता और अब से 2030 तक अनुमानित उत्सर्जन को 1 बिलियन टन कम करने के लिए प्रतिबद्ध है।

विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, भारत नवीन स्वच्छ ऊर्जा समाधानों के साथ अपनी विशाल ऊर्जा मांग को पूरा करने की ओर देख रहा है, सिंह ने स्वच्छ ऊर्जा मंत्रिस्तरीय (सीईएम13) और मिशन इनोवेशन (एमआई-7) की संयुक्त मंत्रिस्तरीय पूर्ण बैठक को संबोधित करते हुए "ग्लोबल क्लीन एनर्जी एक्शन फोरम 2022", पिट्सबर्ग, पेनसिल्वेनिया यूएस में  कहा।
उन्होंने कहा कि भारत ने जैव आधारित अर्थव्यवस्था के लिए एक रोडमैप और रणनीति विकसित की है जो 2025 तक 150 अरब डॉलर की ओर बढ़ रही है।

मंत्री श्री सिंह ने कहा, इससे कम कार्बन वाले जैव-आधारित उत्पादों के जैव-विनिर्माण के लिए बुनियादी ढांचे की सुविधा होगी। हाल ही में, भारत ने लागत प्रतिस्पर्धी हरित हाइड्रोजन उत्पादन को सक्षम करने के लिए राष्ट्रीय हाइड्रोजन ऊर्जा मिशन भी शुरू किया है।

मंत्री ने स्वीकार किया कि स्वच्छ ऊर्जा मंत्रिस्तरीय (सीईएम) सेटअप भारत को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वच्छ ऊर्जा विकास में अपने योगदान को प्रदर्शित करने का एक अनूठा अवसर प्रदान करने में सक्षम है।