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भारतीय सेमीकंडक्टर सेक्टर

भारतीय सेमीकंडक्टर सेक्टर

भारतीय सेमीकंडक्टर सेक्टर में एक हज़ार करोड़ डॉलर से ज़्यादा का आयात करने वाला राष्ट्र है।  लेकिन जैसा की कार मैन्युफैक्चरिंग के साथ हुआ वैसा सेमीकंडक्टर के साथ नहीं हुआ और आज भी हम चीन और कोरिया जैसे देशों पर लगभग पूरी तरह से निर्भर हैं। भारत की पिछली सरकारों ने भी प्रयास किये ताकि भारत में भी सेमीकंडक्टर मनुफैचरिंग को बढ़ावा दिया जा सके मगर इसमें कोई खास सफलता नहीं मिली। आइये समझते हैं की क्यों सेमीकंडक्टर सेक्टर इतना महत्वपूर्ण है और भारत को यदि एक महाशक्ति बनना है तो सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग में भी महारत हासिल करनी होगी। ऐसा है की आज के समय में जब दुनिया इंटरनेट ऑफ़ थिंग्स (IoT ) की तरफ बढ़ रही है जिसमे हर डिवाइस इंटरनेट से जुड़ा होगा स्मार्ट उपकरणों की संख्या बढ़ेगी ऐसे में बड़ी जनसख्या वाले राष्ट्रों का सेमीकंडक्टर मनुफक्चरिंगमे महारत हासिल करना मजबूरी बन जाएगा क्युकी उन्हें सस्ते स्मार्ट उपकरणों को अपनी जनता को उपलब्ध करना बड़ी चुनौती होगा और यदि आयात पर निर्भरता बानी रही तो ऐसे राष्ट्रों के मार्किट में विदेशी कम्पनीज और राष्ट्रों का वर्चस्वा बना रहेगा जैसा की हमने चीनी मोबाइल, टीवी, और अन्य उपकरणों का भारतीय बाज़ारो में वर्चस्व देखा।  हाल ही में भारत का चीन से टकराव बढ़ा है और भारत चाह कर भी चीनी उपकरणों का विकल्प उपलध करा पाने में असफल रहा है क्यूंकि भारत के पास खुद का सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर नहीं है।
यु तो भारत में VLSI स्तर की चिप बनाने की क्षमता उपलब्ध है लेकिन ये काफी नहीं है क्यूंकि मुख्य रूप से टीवी, मोबाइल, और आम इस्तेमाल वाले इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बनाने के लिए ये पूरी तरह से सक्षम नहीं है और साथ ही इलेक्ट्रॉनिक स्क्रीन बनाने की क्षमता को भी जल्द ही पाना होगा। तभी जाकर हम कही इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को पूर्ण रूप से स्वदेशी बनाने में सक्षम हो पाएंगे जो की आम जनता के लिए उतने ही उपयोगी होंगे जो की चीनी उपकरण को टक्कर दे सके। मगर हमें ये भी समझना होगा की भारत में रेयर एअर्थ मैटेरियल्स की पैदावार भी लगभग न के बराबर है और हमारी जितनी ज़रुरत है उतनी मात्रा में रेयर एअर्थ मटेरियल सिर्फ चीन में उत्पन्न किये जाते हैं।
अब भारत सरकार ने चिप मनुफैचरिंग क्र तरफ ठोस कदम बढ़ाते हुए भारतीय सेमीकंडक्टर मिशन को बनाया है जिसके तहत सेमीकंडक्टए चिप मैनुफैचरिंग के लिए एक संपूर्ण इकोसिस्टम को बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इस योजना के तहत ऐसी कम्पनीज़ को फैक्ट्री लगाने के लिए स्पेशल इकनोमिक जोन, रॉ मटेरियल, ट्रांसपोर्टेशन के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर और मार्केट भी उपलब्ध करने के लिए लामबंद है। 
वैसे देखा जाये तो हमारे देश ने शायद कुछ वर्ष की देरी कर दी ऐसे बड़े कदम को उठाने में अगर यही कदम एक दशक पूर्व उठाये गए होते तो आज शायद हम भी स्वदेशी उपकरणों को अपने मार्केट में देख पाते।
HT