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ग्रामीण इलाकों में सिर्फ 8% बच्चे कर पा रहे ऑनलाइन पढ़ाई, सर्वे में हुआ खुलासा

ग्रामीण इलाकों में सिर्फ 8% बच्चे कर पा रहे ऑनलाइन पढ़ाई, सर्वे में हुआ खुलासा

कोरोना संक्रमण काल में जहां स्कूल से लेकर ऑफिस सब ऑनलाइन हो गया है वहीं अब सामने आया है कि ऑनलाइन क्लास लेने में हर बच्चा सक्षम नहीं है। दरअसल इकोनॉमिस्ट ज्यां द्रेज, रीतिका खेरा और शोधकर्ता विपुल पैकरा की टीम ने एक सर्वे में पाया कि देश के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले छात्रों की पढ़ाई को काफी नुकसान हुआ है।


इनके सर्वे में सामने आया कि ग्रामीण इलाकों के मात्र आठ प्रतिशत छात्र ही नियमित रूप से ऑनलाइन क्लास लेकर पढ़ाई कर पा रहे है। वहीं इन इलाकों में 37 प्रतिशत बच्चे ऐसे हैं जो बिलकुल पढ़ाई नहीं कर पा रहे।


प्राइवेट स्कूल छोड़ रहे बच्चे


सर्वे में पता चला कि आर्थिक परेशानी के कारण अभिभावकों ने प्राइवेट स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों को स्कूल से निकाल लिया है। बीते 17 महीनों में निजी स्कूलों में से लगभग 25 प्रतिशत अभिभावकों ने अपने बच्चों को बाहर निकाला है। इन बच्चों को सरकारी स्कूलों में दाखिला दिलाया गया है।


टीम ने 15 राज्यों में किया सर्वे


बता दें कि ये सर्वे इकोनॉमिस्ट ज्यां द्रेज, रीतिका खेरा और रिसर्चर विपुल पैकरा की टीम ने किया है। सर्वे में कक्षा पहली से आठवीं तक के 1400 छात्रों को शामिल किया गया। ये सर्वे 15 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश ( असम, बिहार, चंडीगढ़, दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, पंजाब, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल) में किया गया।


ऑनलाइन शिक्षा है सीमित


इस दौरान सामने आया कि ऑनलाइन शिक्षा हर किसी तक नहीं पहुंच सकती। इसकी सीमा सीमित है। सिर्फ 24% शहरी छात्रों के पास ऑनलाइन शिक्षा की पहुंच है जबकि ग्रामीण छात्रों पर ये संख्या और सीमित यानी मात्र आठ प्रतिशत हो जाती है।


खासतौर पर उन छात्रों के पास इसकी पहुंच नहीं है जो कम सुविधाओं या सुविधाओं के अभाव के साथ रहते है। लगभग 60% लोग ग्रामीण इलाकों के हैं और इनमें से 60% आदिवासी समुदाय से आते है।


सुविधाओं का अभाव है कारण


ग्रामीण परिवारों में जहां ऑनलाइन शिक्षा की पहुंच मात्र आठ प्रतिशत है उसका बड़ा कारण सुविधाओं का अभाव भी है। दरअसल अधिकतर लोगों के पास स्मार्टफोन नहीं है। जिन घरों में स्मार्टफोन है वहां भी हर समय स्मार्टफोन का इस्तेमाल करना मुनासिब नहीं है क्योंकि अकसर कामकाजी लोग स्मार्टफोन ले जाते है।


ऐसे में बच्चे क्लास नहीं ले पाते। सर्वे के मुताबिक ऑनलाइन पहुंच रखने वाले बच्चों का अनुपात शहरी क्षेत्रों में 31 प्रतिशत और ग्रामीण क्षेत्रों में 15 प्रतिशत है। 


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