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मजबूर हुई महिला पत्रकार ढके चेहरे के साथ पेश कर रही खबरें

मजबूर हुई महिला पत्रकार  ढके चेहरे के साथ पेश कर रही खबरें

हाल ही में महिला एंकर्स ढके हुए चेहरे के साथ नजर आई है । यह असर है तालिबान के नए फरमान का। हालांकि अफगानिस्तान में कई महिला पत्रकारों ने इस आदेश का विरोध किया है 

लेकिन बढ़ते दबाव के चलते उन्हें यह बात माननी पड़ रही है। 1996 से लेकर 2001 तक महिलाओं पर कई सख्त प्रतिबंध लगाए गए थे।  बीते साल अगस्त में तालिबान ने काबुल पर कब्जा कर अफगानिस्तान में दोबारा सत्ता हासिल कर ली थी जिसके चलते हाल ही में तालिबान ने नए आदेश जारी किए हैं, जिनमें महिलाओं और लड़कियों को निशाना बनाकर कई प्रतिबंध शामिल हैं।

टोलो न्यूज में रविवार को महिला एंकर्स ने हिजाब और नकाब के साथ न्यूज बुलेटिन पेश की। प्रेजेंटर सोनिया नियाजी ने बताया कि उन्होंने मास्क पहनने के फरमान का विरोध किया तो उन  पर दवाब बनाया गया और कहा गया कि जो फीमेल प्रेजेंटर्स बगैर चेहरा ढंके स्क्रीन पर आएंगी उन्हें कोई अन्य काम दे दिया जाएगा या हटा दिया जाएगा। उन्होंने कहा, 'टोलो न्यूज मजबूर था और उन पर दवाब के कारण हमें यह पहनना पड़ा।' यह सब सोनिया नियाजी ने एजेंसी एएफपी को बताया। महिलाओ के कंधे से कन्धा मिला कर आगे बढ़ने के लिए पुरुषों ने भी टोलो न्यूज में दफ्तर में मास्क पहना।

खास बात है कि इसे पहले अफगानिस्तान में महिला पत्रकारों को स्कार्फ पहनकर ही खबरें पेश करने की अनुमति थी। मोहम्मद आकिप सदिक मोहाजिर (मंत्रालय के प्रवक्ता) ने कहा कि अधिकारी इस बात से खुश है कि मीडिया संस्थानों ने ड्रेस कोड का पालन किया है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि तालिबान चैनल में महिला पत्रकारों के काम करने के खिलाफ नहीं है।